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खूंटी में टीबी मरीजों के लिए नई पहल: बलगम सैंपल अब डाक विभाग से भेजे जाएंगे

खूंटी, झारखंड में स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मरीजों के बलगम सैंपल को डाक विभाग के माध्यम से रांची भेजने की नई व्यवस्था शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य जांच में तेजी लाना और मरीजों के इलाज में सुधार करना है। विशेष पैकेजिंग के जरिए नमूनों को सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे संक्रमण का खतरा कम होगा। यह योजना झारखंड को 2029 तक टीबी मुक्त बनाने के बड़े अभियान का हिस्सा है।
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खूंटी में टीबी मरीजों के लिए नई पहल: बलगम सैंपल अब डाक विभाग से भेजे जाएंगे

खूंटी में टीबी के खिलाफ नई पहल

खूंटी, झारखंड। खूंटी जिला स्वास्थ्य विभाग ने झारखंड को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से एक नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, जिले के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले टीबी मरीजों के बलगम के नमूने डाक विभाग के माध्यम से रांची भेजे जाएंगे ताकि उनकी बेहतर जांच हो सके।

इस नई व्यवस्था से नमूनों को समय पर जांच केंद्र तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे मरीजों के त्वरित और सटीक इलाज की प्रक्रिया में सुधार होगा। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि खूंटी जिला यक्ष्मा केंद्र से इस सेवा की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। पहले चरण में, दो टीबी पॉजिटिव मरीजों के बलगम के नमूनों को डाक विभाग के जरिए रांची स्थित Intermediate Reference Laboratory (IRL) इटकी भेजा गया है। अब से जिले के सभी चिन्हित मरीजों के सैंपल इसी नियमित व्यवस्था के तहत भेजे जाएंगे ताकि उनकी दवा के प्रति संवेदनशीलता की सटीक जांच हो सके।

संक्रमण से बचाव के लिए विशेष पैकेजिंग

मरीजों के सैंपल को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है ताकि वे यात्रा के दौरान खराब न हों और संक्रमण का खतरा न बढ़े। स्वास्थ्य विभाग इन नमूनों को भेजने के लिए पांच स्तरीय सुरक्षित पैकेजिंग का उपयोग कर रहा है। डाक विभाग की त्वरित लॉजिस्टिक्स सेवा के कारण ये सैंपल बिना किसी देरी के सीधे लैब पहुंच जाएंगे।

समय की बचत और मरीजों को राहत

इस नई पहल के कई लाभ होंगे, क्योंकि पहले कूरियर या अन्य विकल्पों के लिए इंतजार करना पड़ता था, जिससे सैंपल भेजने में देरी होती थी। अब डाक विभाग की सहायता से रिपोर्ट जल्दी प्राप्त होगी। समय पर जांच रिपोर्ट मिलने से डॉक्टरों को मरीजों की स्थिति का सही पता चलेगा और उनकी दवाइयां तुरंत शुरू की जा सकेंगी। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मरीजों को रांची जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

2029 तक झारखंड को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य

यह पहल राज्य सरकार के एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य झारखंड को वर्ष 2029 तक पूरी तरह से टीबी मुक्त बनाना है। इसके लिए पूरे राज्य में विशेष टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें पोर्टेबल एक्स-रे और एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार टीबी मरीजों को बेहतर पोषण के लिए प्रति महीने ₹1000 की निक्षय पोषण सहायता राशि भी प्रदान कर रही है।