खेल साहित्य का योगदान: ओलंपियन राजिंदर सिंह सीनियर का दृष्टिकोण
खेल साहित्य की प्रासंगिकता पर चर्चा
चंडीगढ़ - अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने के लिए एक मजबूत खेल संस्कृति का निर्माण आवश्यक है, और इसमें खेल साहित्य का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विचार ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्तकर्ता राजिंदर सिंह सीनियर ने पंजाब कला भवन में आयोजित 'खेल साहित्य की प्रासंगिकता' विषयक समारोह में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम भारतीय साहित्य अकादमी, दिल्ली और पंजाब कला परिषद, चंडीगढ़ के सहयोग से आयोजित किया गया था।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, राजिंदर सिंह ने कहा कि खेल साहित्यकार खेलों की कमियों और समस्याओं पर लिखकर समाज को जागरूक कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक खिलाड़ी अपनी मेहनत और संघर्ष से अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है, और लेखों में इनकी मेहनत का उल्लेख होना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने श्रोताओं के सवालों का भी जवाब दिया और उन्हें सम्मानित किया गया।
प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक सरबजीत सिंह धालीवाल ने अपने अध्यक्षीय भाषण में खेल साहित्य के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ओलंपिक के प्रारंभिक दिनों में साहित्य भी इस खेल महोत्सव का हिस्सा था और साहित्यिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती थीं। उन्होंने पंजाबी कवि प्रो. पूरन सिंह की खेलों पर लिखी कविताएं सुनाईं और विश्व साहित्य में खेलों पर लिखी गई कुछ कविताओं के अनुवाद प्रस्तुत किए।
खेल लेखक और लोक संपर्क विभाग के डिप्टी डायरेक्टर नवदीप सिंह गिल ने कहा कि खेल हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने प्राचीन खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल लेखक का कार्य विजेताओं को प्रोत्साहित करना और पराजित खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होता है। उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में खेल साहित्य के नए रूपों पर भी चर्चा की।
डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल, जो खेल साहित्य में पहली पीएच.डी. धारक हैं, ने खेल साहित्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह साहित्य खेलों और खिलाड़ियों के इतिहास को संरक्षित करता है। युवा खेल लेखक मनदीप सिंह ने खेलों के सहयोग और सामंजस्य सिखाने वाले पहलुओं पर चर्चा की।
इस समारोह में ओलंपियन राजिंदर सिंह सीनियर को सम्मानित किया गया। मंच संचालन जगदीप सिद्धू ने किया, जिन्होंने समारोह का समापन खेलों पर लिखी कविता के साथ किया। इस अवसर पर कई साहित्यकार, पत्रकार और खेल प्रेमी उपस्थित थे।
