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खैबर पख्तूनख्वा में सिख दंपति की हत्या पर मानवाधिकार आयोग की कड़ी प्रतिक्रिया

खैबर पख्तूनख्वा में एक सिख दंपति की हत्या ने मानवाधिकार आयोग और अन्य संगठनों की चिंता को बढ़ा दिया है। इस घटना के बाद आयोग ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानें इस घटना के पीछे की परिस्थितियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया के बारे में।
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खैबर पख्तूनख्वा में सिख दंपति की हत्या पर मानवाधिकार आयोग की कड़ी प्रतिक्रिया

सिख दंपति की हत्या की घटना

इस्लामाबाद: हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के एक गुरुद्वारे में सिख दंपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। आयोग ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं।


यह बयान उस समय आया जब अज्ञात हमलावरों ने मर्दान के बाबू मोहल्ला ख्वाजा गंज बाजार स्थित गुरुद्वारे में गोलीबारी की। इस हमले में 70 वर्षीय जगन्नाथ और उनकी पत्नी की जान चली गई। हमलावर घटना के बाद मौके से फरार हो गए।


एचआरसीपी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह घटना न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हमले की परिस्थितियों की जांच की आवश्यकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कथित हमलावर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े थे, जो विशेष जांच की मांग करता है और 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कार्यान्वयन में सख्त निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।”


आयोग ने मर्दान के जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) द्वारा इस घटना को व्यक्तिगत दुश्मनी से जोड़ने पर भी सवाल उठाया। आयोग ने पूछा कि प्रारंभिक जांच में इस तरह के निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा गया।


एचआरसीपी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे मामले की सभी संभावित दिशाओं में गहन जांच करें और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दें।


इस घटना की निंदा करते हुए अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने कहा कि यह हत्या पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के नाजुक आश्वासनों पर हमला है।


वीओपीएम ने अपने बयान में कहा, “यह केवल दो व्यक्तियों पर हमला नहीं था; यह पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के कमजोर वादे पर हमला था। अधिकारियों ने इसे ‘लक्षित हमला’ बताया है, लेकिन बार-बार होने वाली हिंसा के सामने इस तरह की भाषा अब सामान्य हो चुकी है। जो नहीं बदलता, वह है एक सा पैटर्न! जिसमें अल्पसंख्यक पीड़ित हैं, धार्मिक स्थल असुरक्षित हैं, हमलावर अज्ञात हैं, और जांच का वही ढर्रा है जो शायद ही कभी न्याय दिला पाता है।”


संगठन ने यह भी कहा कि यह हमला कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के एक व्यापक और चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है।