गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी: सुप्रीम कोर्ट के जज का महत्वपूर्ण बयान
इफ्तार पार्टी का विवाद
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के बीच आयोजित इफ्तार पार्टी का मामला फिर से चर्चा में है। इस पार्टी में शामिल युवकों को गिरफ्तार किया गया था, जिन पर आरोप था कि वे गंगा नदी पर चिकन बिरयानी का सेवन कर रहे थे। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा नदी पर चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है और इसे रोकने के लिए कोई कानून भी नहीं है। इसलिए, युवकों को कई महीनों तक जेल में रखना उचित नहीं है।
घटना का विवरण
यह घटना मार्च 2026 की है, जब 14 युवक नाव में बैठकर इफ्तार पार्टी का आनंद ले रहे थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने न केवल गंगा नदी में चिकन बिरयानी खाई, बल्कि चिकन की हड्डियां भी नदी में फेंकीं। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में, उनकी जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन कुछ महीनों बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।
जज की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने इस मामले पर कहा, 'क्या ऐसे मामलों में आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती, जो वास्तव में कोई अपराध नहीं है? मेरे अनुसार, चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। ऐसे में आरोपियों को गिरफ्तार करना और उन्हें महीनों तक जेल में रखना उचित नहीं है।'
छात्रों के अधिकार
जज उज्ज्वल भुइयां ने कॉलेज कैंपस में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों की गिरफ्तारी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विचार व्यक्त करना सभी नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यदि छात्र अपने कॉलेज में शांतिपूर्ण तरीके से अपने विचार व्यक्त करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है और कई दिनों तक जमानत नहीं मिलती।
