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गंगा सफाई अभियान: नमामि गंगे की प्रगति और चुनौतियाँ

गंगा नदी की सफाई के लिए चलाए जा रहे 'नमामि गंगे' कार्यक्रम की प्रगति और चुनौतियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। इस कार्यक्रम के तहत कई सीवेज परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ अभी भी अधूरी हैं। जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा के प्रदूषण स्तर में सुधार हुआ है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों के तहत घड़ियाल और डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि हुई है। जानें इस अभियान की पूरी कहानी।
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गंगा नदी का महत्व और सफाई की आवश्यकता

गंगा, जो उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से पश्चिम बंगाल के गंगा सागर तक फैली हुई है, भारत की प्राचीन नदियों में से एक मानी जाती है। इसके किनारे कई सांस्कृतिक महानगर स्थित हैं। हरिद्वार के बाद, गंगा में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जो मैदानी क्षेत्रों में यमुना के साथ भी समान है। इस समस्या के समाधान के लिए, जून 2014 में सरकार ने 'नमामि गंगे' कार्यक्रम की शुरुआत की।


नमामि गंगे कार्यक्रम की उपलब्धियाँ

गंगा की सफाई के लिए चलाए जा रहे नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत अब तक 147 सीवेज परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, कुल 219 परियोजनाओं की योजना बनाई गई है, जिनकी लागत लगभग 35,664 करोड़ रुपये है। गंगा बेसिन के 10 राज्यों में 6,603 मिलियन लीटर प्रति दिन (MLD) क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 4,341 MLD की शोधन क्षमता पहले से तैयार हो चुकी है।


गंगा की स्थिति में सुधार

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की 2025 की रिपोर्ट में गंगा की मुख्य धारा के प्रदूषित हिस्सों में सुधार देखा गया है। हरिद्वार से सुल्तानपुर तक का प्रदूषित क्षेत्र अब सूची से बाहर हो चुका है। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है, लेकिन बिहार के कुछ हिस्से अभी भी प्रदूषित हैं।


जैव विविधता में सुधार

जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों के तहत, वैज्ञानिक सर्वेक्षण में 7,680 किमी नदी क्षेत्र में 3,037 घड़ियाल पाए गए हैं। राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना भी बनाई गई है। 2021-23 के सर्वे में 6,327 नदी डॉल्फिन की पहचान की गई, जिनमें 6,324 गंगा डॉल्फिन शामिल हैं।


अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं

नमामि गंगे के तहत 219 सीवेज परियोजनाओं में से 72 अभी भी अधूरी हैं। कुल 6,603 MLD क्षमता में से 4,341 MLD तैयार हो चुकी है, जबकि 2,262 MLD की शोधन क्षमता का काम अभी बाकी है। मंत्रालय ने परियोजनाओं में देरी के कारणों में उपयुक्त भूमि की पहचान और सीवर नेटवर्क के लिए आवश्यक मंजूरियों का उल्लेख किया है।


नमामि गंगे पर खर्च

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने जून 2014 से 15 मार्च 2026 तक विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों को कुल 21,340 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसमें से 16,025.97 करोड़ रुपये सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं के लिए दिए गए हैं।


गंगा की सफाई के लिए तकनीकी दृष्टिकोण

नमामि गंगे कार्यक्रम में 'टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल' दृष्टिकोण अपनाया गया है। विभिन्न तकनीकों का चयन स्थानीय भूगोल और सीवेज की प्रकृति के अनुसार किया जाता है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में गैर-जैविक इलेक्ट्रोकोएगुलेशन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।