गणेश चतुर्थी: भारत के विभिन्न राज्यों में उत्सव का अनोखा अंदाज
गणेश चतुर्थी का महत्व
नई दिल्ली: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी का आगमन धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन हर राज्य में इसे मनाने का तरीका भिन्न होता है। कहीं इसे 10 दिनों तक सार्वजनिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, तो कहीं परिवार के साथ पूजा की जाती है।
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव
महाराष्ट्र: यहां गणेशोत्सव एक सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व धार्मिक अनुष्ठान से बढ़कर राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। मुंबई में लालबागचा राजा की भव्य प्रतिमाएं और विशाल पंडालों में सजावट इस पर्व का मुख्य आकर्षण हैं। लालबागचा राजा को 'नवसाचा गणपति' कहा जाता है, जिनके दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। इस उत्सव में नारियल और गुड़ से बने उकडीचे मोदक विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं।
गोवा में गणेश चतुर्थी
गोवा: यहां गणेश चतुर्थी को 'चवथ' कहा जाता है। गोवा में मिट्टी से बनी गणेश की मूर्तियों को घर लाकर 'माटोली' सजाने की परंपरा है। यह प्रकृति के प्रति गोवा के प्रेम को दर्शाता है। पहले दिन माता गौरी की पूजा की जाती है, और उत्सव कई दिनों तक चलता है। इस दौरान विशेष मानसूनी मिठाई बनाई जाती है।
कर्नाटक में उत्सव
कर्नाटक: गणेश चतुर्थी से पहले गौरी हब्बु की पूजा की जाती है। इसके बाद बेंगलुरु और हुबली जैसे शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और भव्य पूजा होती है। गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन उत्सव के अंत में धूमधाम से किया जाता है।
आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गणेश चतुर्थी
आंध्र प्रदेश: यहां लोग मिट्टी या हल्दी से बनी गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। चित्तूर जिले में वार्षिक ब्रह्मोत्सव मनाया जाता है।
तमिलनाडु: यहां इसे 'विनायक चतुरथाई' कहा जाता है। भगवान गणेश को आमतौर पर अकेले पूजा जाता है। इस अवसर पर कोझुकट्टई विशेष पकवान के रूप में बनाया जाता है।
बिहार में गणेश चतुर्थी
बिहार: यहां चौरचन पर्व मनाया जाता है। महिलाएं संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।
