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गाजीपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ा, सुरक्षा बैरियर की स्थिति पर उठे सवाल

गाजीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे सुरक्षा बैरियर की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पोस्ता घाट पर बैरियर का एक सिरा खुला हुआ है, जिससे सुरक्षा में कमी आई है। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए बैरियर लगाए हैं, लेकिन उनकी स्थिति चिंताजनक है। जानें इस मामले में स्थानीय लोगों की चिंताएं और प्रशासन की प्रतिक्रिया के बारे में।
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गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार

गाजीपुर: गंगा नदी का जलस्तर अब खतरे के निशान को पार कर चुका है। इस संवेदनशील स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए गए फ्लोटिंग बैरियर की स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। पोस्ता घाट पर पिछले एक सप्ताह से बैरियर का एक सिरा खुला हुआ है और तेज धारा में लटक रहा है।


जिलाधिकारी के निर्देश पर गंगा घाटों पर डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए लगभग 50 लाख रुपये की लागत से पांच घाटों पर फ्लोटिंग बैरियर स्थापित किए गए हैं। इसका मतलब है कि प्रत्येक घाट पर सुरक्षा के लिए करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन पोस्ता घाट पर बैरियर का एक सिरा सुरक्षित नहीं होने से पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।


स्थानीय निवासियों का कहना है कि बैरियर का दूसरा सिरा किसी तरह घाट की सीढ़ियों से बांधकर रखा गया है। जिस फ्लोटिंग बैरियर का उद्देश्य लोगों को गहरे पानी और तेज बहाव से सुरक्षित रखना है, वही अब तेज धारा में असुरक्षित स्थिति में दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन को इसकी जानकारी देने के बावजूद इसे ठीक नहीं किया गया है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश के बाद सभी प्रमुख गंगा घाटों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, लेकिन केवल पुलिस की मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। पोस्ता घाट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार और गंगा स्नान के लिए आते हैं। ऐसे में गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बीच सुरक्षा उपकरणों का सही स्थिति में रहना अत्यंत आवश्यक है।


स्थानीय पुजारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी को फोन करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठाया गया। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।


इस प्रकार, पोस्ता घाट पर फ्लोटिंग बैरियर के खुले रहने की तस्वीरें प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचकर बैरियर को सुरक्षित करें और घाटों पर लगाए गए सुरक्षा उपकरणों की जांच करें।