गुजरात में राजनीतिक दलों के फर्जी चंदे का बड़ा खुलासा: 560 करोड़ का टैक्स नुकसान
गुजरात में राजनीतिक दलों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश
नई दिल्ली: राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे पर टैक्स छूट का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर गुजरात पुलिस की सीआईडी क्राइम ने तीन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और उनके अधिकारियों के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इस घोटाले के कारण सरकार को लगभग 560 करोड़ रुपये का टैक्स नुकसान होने का अनुमान है। आरोप है कि इन दलों ने मिलकर करीब 1,870 करोड़ रुपये का फर्जी चंदा दिखाया, जिसके लिए फर्जी कंपनियों का निर्माण किया गया और नकली बिल तैयार किए गए। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलाया गया। इस रैकेट में 4 से 10 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी राशि दानदाताओं को नकद लौटाई जाती थी।
घोटाले में शामिल दलों का विवरण
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ये तीनों दल 2017 से गुजरात में चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन हर बार इनके उम्मीदवारों की जमानत जब्त होती रही है। सबसे बड़ा घोटाला भारतीय नेशनल जनता दल (BNJD) द्वारा किया गया, जिसने 56,238 दानदाताओं से 1,143.85 करोड़ रुपये का फर्जी चंदा प्राप्त किया, जिससे सरकार को 343 करोड़ रुपये का टैक्स नुकसान हुआ। स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (SAP) ने 519 करोड़ रुपये का चंदा दिखाकर 155 करोड़ रुपये का टैक्स चूना लगाया, जबकि गरीब कल्याण पार्टी (GKP) ने 206.76 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त कर 62 करोड़ रुपये की टैक्स हेराफेरी की। इस पार्टी से जुड़ी कंपनियों के खातों में 1,295 करोड़ रुपये से अधिक के क्रेडिट ट्रांजैक्शन भी पाए गए हैं।
कैशबैक का खेल कैसे चलता था
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग ने एक साल से अधिक समय तक चली जांच में इस रैकेट के तरीके को उजागर किया है। दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80GGC के तहत रजिस्टर्ड राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। इसी छूट का लाभ उठाते हुए दानदाता चेक या RTGS के माध्यम से इन दलों के बैंक खातों में पैसे भेजते थे। प्राप्त राशि को ये दल 'जय राम एंटरप्राइजेज', 'किसान एंटरप्राइजेज' और 'के.जे. ट्रेडिंग' जैसी फर्जी कंपनियों को ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद नकली बिल तैयार किए जाते और बैंक से नकद राशि निकालकर 4 से 10 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी राशि असली दानदाताओं को वापस की जाती थी।
चुनाव आयोग को गुमराह करने की कोशिश
इस फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए चुनाव आयोग को गुमराह करने की पूरी योजना बनाई गई थी। इसके लिए फर्जी कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट यानी फॉर्म 24A और नकली ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जाती थीं। हैरानी की बात यह है कि इसमें शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने बिना खातों की सही जांच किए महज 50 हजार रुपये नकद लेकर बैलेंस शीट पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए और उन्हें सरकारी पोर्टल पर अपलोड कर दिया।
FIR में शामिल आरोपियों की सूची
सीआईडी क्राइम की गांधीनगर जोन टीम ने भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। BNJD पार्टी के अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार विष्णुभाई गजेरा को इस सिंडिकेट का मुख्य मास्टरमाइंड बताया गया है। अन्य आरोपियों में महासचिव विपुल सोलंकी, कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा और सीए आदिल सैयद शामिल हैं। SAP पार्टी में मेहुल कुमार महेशकुमार खत्री, सुरेंद्रसिंह पुरुषोत्तमदास तिवारी और सीए मुकुंदभाई चंदनसिंह राठौड़ को आरोपी बनाया गया है, जबकि GKP पार्टी में अध्यक्ष नीरज कुमार क्षत्रिय, सचिव धनंजय सिंह राजपूत, कोषाध्यक्ष धीरज कुमार क्षत्रिय समेत कई अन्य लोग और तीन सीए के नाम शामिल हैं।
कागजों पर चलती थीं पार्टियां
दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों दल असल में केवल कागजों पर सक्रिय थे और कमीशन कमाने का साधन बने हुए थे। इनकी कोई वास्तविक राजनीतिक गतिविधि नहीं थी। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत जब किसी उम्मीदवार को कुल वैध वोटों का 1/6वां हिस्सा यानी 16.67 प्रतिशत वोट नहीं मिलते, तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है। इन तीनों दलों का वोट शेयर राज्य स्तर पर 0.01 प्रतिशत से भी कम रहा। उदाहरण के लिए, 2024 के लोकसभा और 2022 व 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों में इनके उम्मीदवारों को महज 300 से 1700 वोट ही मिले, और हर बार सभी की जमानत जब्त हुई।
संपत्तियों की जब्ती और चार्जशीट
जांच कर रहे गुजरात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चूंकि आयकर विभाग खुद इस मामले में शिकायतकर्ता है, इसलिए पुलिस के पास पुख्ता दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं। अधिकारी के अनुसार, फोरेंसिक सबूत जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की जाएगी। जांच पूरी होने तक आरोपियों के बैंक खातों के इस्तेमाल और संपत्तियों को बेचने से रोकने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अपराध से अर्जित सभी संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा, ताकि कोर्ट में मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके और ऐसे फर्जीवाड़े करने वालों को कड़ा सबक सिखाया जा सके। फिलहाल इस मामले पर तीनों राजनीतिक दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
