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गुजरात में वन विभाग के अधिकारियों पर हमले के मामले में आप विधायक सहित 9 को मिली 7 साल की सजा

गुजरात में आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा और उनकी पत्नी सहित 9 लोगों को वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट करने के आरोप में 7 साल की सजा सुनाई गई है। यह मामला तब शुरू हुआ जब वन विभाग ने जंगल की जमीन पर अतिक्रमण हटाया। आरोपियों ने अधिकारियों से फिरौती मांगी और अवैध हथियार से फायरिंग भी की। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के घटनाक्रम।
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गुजरात में वन विभाग के अधिकारियों पर हमले के मामले में आप विधायक सहित 9 को मिली 7 साल की सजा

दोषियों में विधायक की पत्नी भी शामिल


गुजरात के नर्मदा जिले में आम आदमी पार्टी के विधायक, उनकी पत्नी और अन्य 7 व्यक्तियों को अदालत ने 7 साल की सजा सुनाई है। इन सभी पर वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट और वसूली का आरोप था। नर्मदा की एक अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान किया।


अदालत ने दोषियों पर 96,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इनमें से 4 महिलाएं भी शामिल हैं। विधायक चैतर वसावा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में डेडियापाड़ा सीट से जीत हासिल की थी।


जंगल की जमीन पर अतिक्रमण हटाने पर हुआ विवाद

यह मामला 30 अक्टूबर 2023 का है। आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल की जमीन पर अतिक्रमण हटाने का कार्य किया था। इसके बाद वसावा ने पांच अधिकारियों को अपने घर बुलाया। प्राथमिकी के अनुसार, चैतर वसावा और उनके सहयोगियों ने अधिकारियों के साथ मारपीट की और ग्रामीणों को मुआवजा देने के नाम पर वसूली की।


अवैध हथियार से की गई फायरिंग

अभियोजन पक्ष का कहना है कि चैतर वसावा ने इस दौरान हवाई फायरिंग भी की थी। आरोप है कि जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, उसका लाइसेंस उनके पास नहीं था, जिसके चलते उन पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया।


फिरौती की मांग और ऑनलाइन ट्रांसफर

घटना के अगले दिन, चैतर वसावा के निजी सहायक और अन्य ने दो अधिकारियों से 30-30 हजार रुपए की फिरौती मांगी। चूंकि वन कर्मचारियों के पास पैसे नहीं थे, उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया और 60 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए। यह सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया गया।


सरेंडर करने के बाद मिली जमानत

चैतर वसावा के अलावा उनकी पत्नी शकुंतला वसावा, निजी सहायक जितेंद्र वसावा और 6 ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया था। शकुंतला उस समय नर्मदा जिला पंचायत की सदस्य थीं।


घटना के बाद कुछ आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन चैतर वसावा कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। उन्होंने 14 दिसंबर 2023 को सरेंडर किया और बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव में भरूच सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें जमानत मिल गई।