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गुजरात हाईकोर्ट ने जामी मस्जिद को जैन मंदिर घोषित करने की याचिका पर मांगा जवाब

गुजरात हाईकोर्ट ने भरूच की जामी मस्जिद को जैन मंदिर घोषित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता, जो जैन हिंदू समुदाय से हैं, ने इस ऐतिहासिक संरचना के संरक्षण की मांग की है। इस विवाद का संबंध राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति के अभियान से है, जो मस्जिद को जैन धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहा है। मुस्लिम ट्रस्टियों ने भी इस मामले में अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। जानें इस जटिल मामले के सभी पहलुओं के बारे में।
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गुजरात हाईकोर्ट की सुनवाई

गुजरात उच्च न्यायालय ने भरूच स्थित ऐतिहासिक 'जामी मस्जिद' को जैन मंदिर के रूप में मान्यता देने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति निशा एम ठाकोर ने शुक्रवार को हरि शंकर जैन और उनके चार सहयोगियों की याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने केंद्र को निर्देश दिया कि वे 13 अक्टूबर तक अपना जवाब प्रस्तुत करें, जो अगली सुनवाई की तारीख भी है.


याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे 'जैन हिंदू समुदाय' से हैं और भगवान मल्लिनाथ की पूजा करते हैं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के रिकॉर्ड में मस्जिद को जैन हिंदू मंदिर के रूप में मान्यता देने की मांग की है। उनका आरोप है कि इस स्मारक में मूर्तियों और कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाया गया है, और उन्हें तीर्थंकर मल्लिनाथ की मूर्ति को और नुकसान होने का डर है.


कानूनी दलीलें और सुरक्षा की मांग

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में मूर्ति की तस्वीरें और एक वीडियो प्रस्तुत किया, जिसमें मूर्ति को नुकसान की आशंका जताई गई। उन्होंने तत्काल अंतरिम सुरक्षा की मांग की। याचिका में प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि ASI को इस संरचना और उसकी सामग्री के संरक्षण की जिम्मेदारी है.


केंद्रीय प्राधिकरणों का पक्ष

केंद्रीय प्राधिकरणों के वकील ने कहा कि संरक्षित स्मारक की देखरेख कानून के अनुसार की जा रही है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता सीधे उच्च न्यायालय में आए हैं, जबकि उन्हें संबंधित प्राधिकरण के पास जाना चाहिए था। फिर भी, अदालत ने कहा कि मूर्ति और संरचना का संरक्षण ASI की जिम्मेदारी है.


विवाद का इतिहास

एक रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति के अभियान से जुड़ा हुआ है। यह दक्षिणपंथी संगठन मई से भरूच में हस्ताक्षर अभियान और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिसमें मांग की जा रही है कि सदियों पुरानी मस्जिद को जैन धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता दी जाए. ASI ने 10 जून को भरूच के जिला कलेक्टर को पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था कि सोशल मीडिया पर स्मारक पर भीड़ जुटाने की अपील की जा रही है.


मुस्लिम पक्ष की चिंताएं

मस्जिद के ट्रस्टियों ने जिला प्रशासन और पुलिस से एहतियाती कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने सार्वजनिक जमावड़ों और मस्जिद की धार्मिक पहचान को चुनौती देने वाले अभियानों पर चिंता व्यक्त की है। ट्रस्टियों ने 3 मार्च की एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें एक समूह परिसर में घुसकर हिंदू अनुष्ठान कर रहा था, और आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें अंदर जाने में मदद की.