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गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में देरी: हाईटेंशन लाइन और कानूनी विवादों का असर

गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में देरी का सामना कर रही है, जिसका मुख्य कारण हाईटेंशन बिजली लाइन और कानूनी विवाद हैं। जीएमआरएल, एनएचएआई और एचवीपीएन के बीच समन्वय की कमी ने कार्य को प्रभावित किया है। जानें इस मुद्दे के बारे में और कैसे यह शहरवासियों को प्रभावित कर रहा है।
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गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में बाधाएं

गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में देरी: गुरुग्राम मेट्रो के विस्तार कार्य में विभागीय समन्वय की कमी और उच्च वोल्टेज बिजली लाइन के कारण महत्वपूर्ण रुकावटें आ रही हैं। जीएमआरएल, एनएचएआई और एचवीपीएन के बीच सहमति न बनने से परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई है। इसके अतिरिक्त, सेक्टर-10 में बिजली घर के स्थानांतरण और भूमि विवादों ने भी कार्य में देरी की संभावना को बढ़ा दिया है।


बुनियादी ढांचे की शिफ्टिंग में समस्याएं: गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) के महत्वाकांक्षी विस्तार प्रोजेक्ट को बुनियादी ढांचे की शिफ्टिंग और कानूनी विवादों के कारण गंभीर रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। हीरो होंडा चौक पर उच्च वोल्टेज बिजली लाइन, सेक्टर-10 बिजली घर का स्थानांतरण और कोर्ट केस के कारण इस महत्वपूर्ण परियोजना का कार्य निर्धारित समय से पीछे चल रहा है।


परियोजना की गति में रुकावट का मुख्य कारण जीएमआरएल, एनएचएआई और हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएन) के बीच समन्वय की कमी है। पिछले साल 22 दिसंबर को जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनएचएआई ने हाईटेंशन लाइन हटाने पर सहमति दी थी।


बैठक के बाद भी कार्य में रुकावट: बैठक में यह तय हुआ था कि एनएचएआई हीरो होंडा चौक के पास हाईटेंशन लाइन को हटाएगा और इसका खर्च जीएमडीए उठाएगा। इसके बाद जीएमआरएल ने 30 अप्रैल को एनएचएआई को पत्र लिखकर लाइन को तुरंत हटाने की मांग की।


16 जुलाई को अधिकारियों के बीच एक और बैठक हुई, जिसमें 31 अक्टूबर तक शिफ्टिंग पूरी करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन, कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई और स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है।


एनएचएआई का इनकार: हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम ने लाइन शिफ्टिंग का विस्तृत अनुमान तैयार कर एनएचएआई को भेजा था। एनएचएआई ने 18 सितंबर को एक पत्र भेजकर इस कार्य को करने से मना कर दिया।


इस निर्णय के बाद अब लाइन हटाने की प्रक्रिया को नए सिरे से तय किया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य में महीनों की देरी होना तय है। इस तकनीकी बाधा का सीधा असर मेट्रो रूट के पिलर निर्माण और सिविल कार्यों पर पड़ रहा है।


सबस्टेशन और कानूनी बाधाएं: हाईटेंशन लाइन के अलावा, सेक्टर-10 में हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम का बिजली घर भी मेट्रो ट्रैक के बीच में आ रहा है। इस सबस्टेशन को सेक्टर-37 में नए स्थान पर शिफ्ट किया जाना है, जिसका निर्माण कार्य अभी चल रहा है।


ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो रूट पर उमंग भारद्वाज चौक के पास पांच मकानों के अधिग्रहण को लेकर कानूनी पेंच फंसा हुआ है। यह मामला अदालत में विचाराधीन होने से ट्रैक निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का कब्जा प्रशासन को नहीं मिल पा रहा है।


409 करोड़ का डिपो धीमा: परियोजना के संचालन को सुचारू बनाने के लिए सेक्टर-33 में 409 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मेट्रो डिपो का निर्माण प्रस्तावित है। जीएमआरएल ने लगभग पांच महीने पहले ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली थी।


टेंडर में पांच बड़ी बुनियादी ढांचा कंपनियों ने अपनी बोलियां जमा की हैं, लेकिन मुख्य ट्रैक का काम रुकने से डिपो निर्माण की गति भी प्रभावित हो रही है। अधिकारियों की ढुलमुल रवैये के कारण शहरवासियों को आधुनिक मेट्रो सेवा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।