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गोरखपुर में गाय की मौत के बाद 450 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन

गोरखपुर में एक गाय की संदिग्ध रेबीज से मौत के बाद, 450 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई। यह गाय दुर्गा पूजा के दौरान चरणामृत बनाने के लिए इस्तेमाल की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर वैक्सीनेशन कैंप आयोजित किया। जानें इस घटना के बारे में और क्या जानकारी मिली है।
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गाय की मौत से गांव में हड़कंप

गोरखपुर में एक गाय की संदिग्ध रेबीज से मौत के बाद, दो गांवों के 450 निवासियों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी पड़ी। यह गाय दुर्गा पूजा के दौरान चरणामृत बनाने के लिए इस्तेमाल की गई थी, और इसके मरने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई थी कि उन्होंने उसी गाय का दूध पिया है।


स्वास्थ्य विभाग की पहल


गाय के दूध से बने चरणामृत का सेवन करने वाले 450 लोगों को एहतियात के तौर पर एंटी-रेबीज वैक्सीन दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को गोला ब्लॉक के डाड़ी खास गांव में एक कैंप आयोजित किया। मंगलवार को 50 लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जाकर टीका लगवाया, जबकि बुधवार को 400 लोगों का वैक्सीनेशन किया गया। CHC की टीम फार्मासिस्ट सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में गांव पहुंची और शाम तक सभी को वैक्सीन दी गई। डॉक्टरों के अनुसार, लोगों को 0, 3, 7, 14, 28वें दिन और 90वें दिन बूस्टर डोज लेनी होगी।



गाय में रेबीज के लक्षण


डाड़ी खास के पशुपालक नवमी यादव को यह नहीं पता था कि उनकी गाय को कब कुत्ते ने काटा था। वह रोजाना इस गाय का दूध दो दुकानों और कुछ घरों में पहुंचाते थे। गाय के असामान्य व्यवहार की जानकारी मिलते ही, दुर्गा पूजा में चरणामृत पीने वाले डाड़ी और गोविंदपुर गांव के लोग चिंतित हो गए।


एहतियात के तौर पर वैक्सीनेशन


गोरखपुर के डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि गाय को कुत्ते ने काटा था और दुर्गा पूजा में उसके दूध से चरणामृत बनाया गया था। गाय की मौत के बाद लोगों में भय था, इसलिए 450 लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई। उन्होंने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि दूध उबालने से वायरस खत्म हो जाता है।