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गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र को नोटिस देने वाले पुलिस अधिकारी का निलंबन

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर शिवा पांडेय को निलंबित कर दिया है। अक्षत ने आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए थे। मामले की जांच जारी है और पुलिस ने नोटिस को वापस ले लिया है।
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पुलिस कार्रवाई के तहत निलंबन

नोएडा: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस भेजने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में ईकोटेक-1 थाने के सब इंस्पेक्टर शिवा पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। अन्य पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एडीसीपी स्तर पर प्रारंभिक जांच के बाद यह कदम उठाया गया है, और विभागीय जांच जारी है।


नोटिस का विवरण

अक्षत त्रिपाठी को चार सितंबर को कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पांच लाख रुपये के निजी मुचलके से संबंधित नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में उनसे छह महीने के लिए शांति बनाए रखने हेतु पांच लाख रुपये का निजी बांड भरने और दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं के तहत की गई थी।


पुलिस रिपोर्ट में आरोप

पुलिस की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अक्षत त्रिपाठी अन्य छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे। उन पर सरकार विरोधी और भ्रामक बातें फैलाने का भी आरोप था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उनकी गतिविधियों से विश्वविद्यालय परिसर में तनाव उत्पन्न हो सकता है।


अक्षत का बचाव

हालांकि, अक्षत त्रिपाठी ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लिया था और जिस समय रिपोर्ट तैयार की गई, वह विश्वविद्यालय में मौजूद नहीं थे। उन्होंने यह भी बताया कि वह काफी समय से कक्षाओं में नहीं जा रहे थे।


मामले का विस्तार

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अक्षत ने जुलाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट में इंटर्नशिप की थी। मामला तब और बढ़ गया जब पांच लाख रुपये के नोटिस पर सवाल उठने लगे और यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अदालत ने इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।


पुलिस की प्रतिक्रिया

विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने अक्षत को जारी नोटिस वापस ले लिया। पुलिस ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को सूचित किया गया और नोटिस को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका की विभागीय जांच शुरू की गई। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी की ओर से छात्र के खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं किया गया था।


जांच की प्रक्रिया

पुलिस द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था। अब एसआई शिवा पांडेय के निलंबन के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों की भूमिका, रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया और नोटिस जारी होने से पहले तथ्यों के सत्यापन की जांच की जा रही है। पुलिस विभाग ने कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।