ग्लोबल पीस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में गिरावट
ग्लोबल पीस इंडेक्स का हालिया आंकड़ा
हाल ही में जारी ग्लोबल पीस इंडेक्स ने दुनिया के शांतिपूर्ण देशों की रैंकिंग को दर्शाया है, जिसमें भारत बांग्लादेश और भूटान जैसे देशों से भी पीछे है। इस सूची में कुल 163 देशों में भारत का स्थान 127वां है। आइसलैंड लगातार 19वीं बार सबसे शांतिपूर्ण देश के रूप में शीर्ष पर बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश को भारत से अधिक शांतिपूर्ण माना गया है, जबकि वहां हाल के वर्षों में कई हिंसक घटनाएं और तख्तापलट हुए हैं। टॉप 10 देशों में न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया, सिंगापुर और जापान शामिल हैं।
दक्षिण एशिया की अस्थिरता
इंस्टिट्यूट फॉर इकॉनमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी इस रैंकिंग के अनुसार, दक्षिण एशिया को दुनिया का सबसे अस्थिर क्षेत्र माना गया है। यही कारण है कि भारत और उसके पड़ोसी देशों की रैंकिंग में गिरावट आई है। यह समझना आवश्यक है कि यह रैंकिंग कैसे निर्धारित की जाती है और भारत जैसे देशों को किन कारणों से पीछे रहना पड़ता है।
पीस इंडेक्स की रैंकिंग कैसे निर्धारित होती है?
इस रैंकिंग में मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि किसी देश में अपराध की दर क्या है, नागरिकों की सुरक्षा का स्तर, आतंकवाद का प्रभाव, सेना पर खर्च और हथियारों का आयात-निर्यात कितना है। कुल 23 सूचकांक हैं जिनके आधार पर किसी देश की रैंकिंग तय होती है। इन सूचकांकों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है।
भारत की रैंकिंग में कमी के कारण
भारत और आइसलैंड की तुलना से यह स्पष्ट होता है कि रैंकिंग में कमी के पीछे क्या कारण हैं। आइसलैंड में कोई सेना नहीं है और न ही वहां पर सेना पर कोई खर्च होता है, जबकि भारत के पास दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी सेना है और इसका सैन्य खर्च 92.1 बिलियन डॉलर है। इसके अलावा, भारत हथियारों के आयात में भी सबसे आगे है। ये सभी कारण भारत को रैंकिंग में पीछे छोड़ देते हैं।
आइसलैंड और भारत की तुलना
आइसलैंड में पुलिस भी हथियार लेकर नहीं चलती, जबकि भारत में अपराधी अक्सर एनकाउंटर में मारे जाते हैं। आइसलैंड में आंतरिक या बाहरी संघर्ष नहीं होते, जबकि भारत में पाकिस्तान के साथ सीमा पर रोजाना फायरिंग होती है। भारत में अपराध, हत्याएं और हथियारों की उपलब्धता अधिक है, जबकि आइसलैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देश इस मामले में शांतिपूर्ण हैं।
पीस इंडेक्स के 23 पैमाने
ये हैं 23 पैमाने:-
- समाज में आपराधिक अवधारणा का स्तर
- कुल जनसंख्या में से आंतरिक विस्थापन झेलने वाले शरणार्थियों की संख्या
- राजनीतिक अस्थिरता
- राजनीतिक आतंक
- आतंकवाद का असर
- प्रति एक लाख जनसंख्या पर हत्या की संख्या
- हिंसक अपराधों का स्तर
- हिंसक प्रदर्शनों की संख्या
- प्रति एक लाख जनसंख्या पर जेल गए लोगों की संख्या
- आंतरिक सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मियों की संख्या
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्ष
- घरेलू संघर्ष की संख्या और उनके जारी रहने का समय
- घरेलू संघर्षों में मौत की संख्या
- बाहरी संघर्ष की संख्या, उनमें देश की भूमिका और उनके जारी रहने का समय
- बाहरी संघर्षों में होने वाली मौतों की संख्या
- घरेलू संघर्ष का स्तर
- पड़ोसी देशों के साथ किसी देश के रिश्ते
- GDP की तुलना में सेना पर खर्च
- प्रति एक लाख व्यक्ति पर सेना के जवानों की संख्या
- प्रति एक लाख जनसंख्या के अनुपात में हथियारों का आयात
- प्रति एक लाख जनसंख्या के अनुपात में हथियारों का निर्यात
- संयुक्त राष्ट्र के पीस कीपिंग मिशन में वित्तीय सहायता
- परमाणु और भारी हथियारों वाली क्षमता
