चंबा मेडिकल कॉलेज में बच्ची की मौत: इलाज में देरी पर परिजनों का आक्रोश
चंबा मेडिकल कॉलेज में बच्ची की दुखद मौत
चंबा मेडिकल कॉलेज की घटना: हिमाचल प्रदेश के चंबा में पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक डेढ़ वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया। बच्ची को गंभीर स्थिति में लाया गया था, और परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली और उन्हें इधर-उधर भेजा गया। उनका कहना है कि यदि बच्ची को समय पर उचित चिकित्सा मिलती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
बच्ची की जांच में समय की बर्बादी
परिवार के अनुसार, बच्ची को रविवार शाम लगभग चार बजे अस्पताल लाया गया। आरोप है कि अस्पताल में पहुंचने के बावजूद उसे तुरंत भर्ती नहीं किया गया और लगभग डेढ़ घंटे बाद उसे दाखिल किया गया। इसके बाद बच्ची को एक्सरे और अन्य जांचों के लिए भेजा गया, लेकिन वहां स्टाफ की कमी के कारण उन्हें निजी लैब का सहारा लेना पड़ा। परिवार का कहना है कि इस प्रक्रिया में समय बर्बाद हुआ और बच्ची की स्थिति बिगड़ती गई।
इलाज के दौरान बिगड़ती स्थिति
परिजनों के अनुसार, जांच के बाद बच्ची को फिर से अस्पताल लाया गया, जहां उसे भाप देने और इंजेक्शन लगाने की बात कही गई। परिवार का आरोप है कि उस समय इमरजेंसी में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। बच्ची की स्थिति लगभग पौने घंटे तक खराब रही। परिजनों का कहना है कि मौत से लगभग 15 मिनट पहले एक डॉक्टर ने बच्ची को देखा और उसके बाद ही उपचार शुरू हुआ। इसके कुछ ही समय बाद बच्ची अचेत हो गई और उसकी मृत्यु हो गई।
डॉक्टरों की कमी का मुद्दा फिर से उठता है
इस घटना ने चंबा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी के मुद्दे को फिर से उजागर किया है। दिसंबर 2025 में RTI के माध्यम से पता चला था कि जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में कई पद खाली हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 59 मेडिकल ऑफिसर और 85 स्टाफ नर्स के पद रिक्त हैं। डेढ़ साल की बच्ची की मौत ने चंबा जैसे पहाड़ी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या कोई विभागीय जांच होती है।
