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चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार की आशंका, सांसद ने उठाई आवाज

लखनऊ में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 82 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है। राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि महानिदेशालय और आपूर्तिकर्ताओं के बीच मिलीभगत से यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा, पुराने उपकरणों की स्थिति की भी जांच की जाएगी। जानें इस मामले में और क्या कुछ सामने आया है।
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लखनऊ में चिकित्सा उपकरणों की खरीद में अनियमितताओं का आरोप


लखनऊ। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में अस्पतालों के उन्नयन के लिए 82 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद में धांधली की आशंका जताई जा रही है। इस मुद्दे पर राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत अस्पतालों के उन्नयन के लिए प्रस्तावित चिकित्सा उपकरणों की खरीद में संभावित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है।


सीमा द्विवेदी ने पत्र में उल्लेख किया है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अस्पतालों के उन्नयन के लिए विभिन्न चिकित्सा उपकरणों और आवश्यक सामग्रियों की खरीद के लिए लगभग 82 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रस्ताव 20 अगस्त 2026 को चिकित्सा अनुभाग-6 को भेजा गया था। प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट होता है कि महानिदेशालय और आपूर्तिकर्ताओं के बीच मिलीभगत से इस प्रस्ताव को तैयार किया गया है। ऐसे में स्वतंत्र और विस्तृत जांच की आवश्यकता है।


चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार की आशंका, सांसद ने उठाई आवाज


चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार की आशंका, सांसद ने उठाई आवाज


जांच के लिए उठाए गए बिंदु
सीमा द्विवेदी ने महानिदेशालय स्तर पर गठित समिति के सदस्यों के नाम, उनके पद और शैक्षिक व तकनीकी योग्यता की जांच की मांग की है। इसके अलावा, उपकरण खरीद से जुड़े एक लिपिक को हाल ही में हटाने के मामले की भी जांच की मांग की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच करोड़ों रुपये के सौदों में संलिप्तता दिखाई है।


पुराने उपकरणों की स्थिति की भी होगी जांच
पहले खरीदे गए उपकरणों की स्थिति की भी जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि कौन से उपकरण कार्यशील हैं और कौन से निष्क्रिय हैं, उन्हें किसने निष्क्रिय घोषित किया, उनकी नीलामी कब हुई और नीलामी से प्राप्त धनराशि का क्या हुआ, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।