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चीन की गाओकाओ परीक्षा: भारत के NEET पेपर लीक के बीच एक मजबूत परीक्षा प्रणाली

भारत में NEET परीक्षा के पेपर लीक के विवाद के बीच, चीन की गाओकाओ परीक्षा ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। यह परीक्षा, जो हाई स्कूल के छात्रों के लिए आयोजित की जाती है, दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है। चीन की परीक्षा प्रणाली में नकल रोकने के लिए कड़े उपाय किए गए हैं, लेकिन क्या यह पूरी तरह लीक-प्रूफ है? जानिए इस परीक्षा की तैयारी और नकल के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में।
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चीन की गाओकाओ परीक्षा: भारत के NEET पेपर लीक के बीच एक मजबूत परीक्षा प्रणाली

भारत में NEET परीक्षा का विवाद

बीजिंग: पिछले महीने भारत में NEET-UG परीक्षा को पेपर लीक के कारण रद्द कर दिया गया था, जिससे देशभर में हंगामा मच गया। इस मुद्दे पर हाल ही में नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किए गए प्रदर्शन ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। NEET पेपर लीक एकमात्र समस्या नहीं है; हाल के महीनों में कई अन्य परीक्षाओं में भी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच, चीन ने अपनी गाओकाओ परीक्षा का आयोजन किया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है।


गाओकाओ परीक्षा का महत्व

रविवार को शुरू हुई गाओकाओ परीक्षा ने वैश्विक ध्यान खींचा है। इसमें भाग लेने वाले छात्रों की संख्या के कारण इसे दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कहा जाता है। यह परीक्षा हाई स्कूल के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए आयोजित की जाती है, और इसके परिणाम के आधार पर उन्हें देशभर की विश्वविद्यालयों में अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिलता है।


चीन की परीक्षा प्रणाली की तैयारी

गाओकाओ परीक्षा का आयोजन चीन के शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परीक्षा ने चीन के उच्च शिक्षा संस्थानों को उत्कृष्ट छात्र प्रदान किए हैं और आर्थिक विकास तथा तकनीकी नवाचार के लिए पेशेवरों की एक बड़ी संख्या तैयार की है। इस परीक्षा की तैयारी बेहद सख्त होती है, जिसमें परीक्षा को किसी भी गड़बड़ी से बचाने के लिए कड़े उपाय किए जाते हैं।


नकल रोकने के लिए चीन की रणनीतियाँ

नकल रोकने के लिए चीन का प्लान

परीक्षा केंद्रों में AI-पावर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम, स्मार्ट सिक्योरिटी स्क्रीनिंग गेट्स, छात्रों के मोबाइल फोन और स्मार्ट वॉच ले जाने पर रोक, और छिपे हुए उपकरणों का पता लगाने के लिए हाई-टेक तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, नकली फिंगरप्रिंट पहचानने के लिए फेशियल रिकग्निशन और ड्रोन से निगरानी की जाती है।


क्या गाओकाओ परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित है?

क्या चीन की गाओकाओ पूरी तरह लीक-प्रूफ?

हालांकि कई लोग इसे लीक-प्रूफ मानते हैं, लेकिन चीन की सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि यह परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हर साल हजारों लोगों को नकल के लिए सजा दी जाती है। 2015 से 2024 के बीच 11,000 से अधिक लोगों को संगठित नकल कराने या परीक्षा में धोखाधड़ी के लिए सजा सुनाई गई है।


चीन में नकल के लिए दंड

चीन में नकल के लिए क्या है सजा?

गाओकाओ परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली या नकल के लिए 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, छोटी-मोटी नकल पर भी छात्रों को जेल हो सकती है और उन्हें सरकारी शिक्षा की परीक्षा में बैठने से 1 से 3 साल तक रोका जा सकता है।