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चीन में मछलियों की निगरानी के लिए AI का उपयोग, पर्यावरण पर प्रभाव

चीन ने तिब्बत की सबसे बड़ी नदी में मछलियों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग शुरू किया है। यह तकनीक मछलियों की पहचान इंसानों की तरह करती है, जिससे पर्यावरण पर प्रभाव और भारत के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े बांध मछलियों के प्राकृतिक प्रवास को बाधित कर सकते हैं। जानें इस प्रोजेक्ट के बारे में और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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चीन का नया AI प्रोजेक्ट

बीजिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग अब इंसानों की निगरानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चीन ने इसे पानी के भीतर भी लागू किया है। तिब्बत की सबसे बड़ी नदी में मछलियों की निगरानी के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो मछलियों की पहचान इंसानों की तरह करता है। एक विशाल बांध के पास मछलियों के गुजरने के लिए बनाए गए विशेष रास्ते पर यह AI सिस्टम 24 घंटे काम कर रहा है। इस कदम ने पर्यावरणविदों का ध्यान आकर्षित किया है और भारत के लिए कई चिंताएं उत्पन्न की हैं।


AI सिस्टम की कार्यप्रणाली

मैनुअल निगरानी का स्थान ले रहा AI
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन यारलुंग त्सांगपो नदी पर बने बांध के 'फिशवे' से गुजरने वाली मछलियों की प्रजातियों का ट्रैक रख रहा है। पहले यह कार्य मैन्युअल रूप से किया जाता था, जो कठिन और थकाऊ था। अब AI-आधारित 'फिश फेशियल रिकग्निशन' तकनीक से हर मछली की सटीक पहचान की जा रही है। 2015 में इस नदी पर 116 मीटर ऊंचा जंगमू हाइड्रोपावर स्टेशन चालू हुआ था, जिसने मछलियों की आवाजाही के लिए एक फिश लैडर बनाया था, जिससे अब तक लगभग 5,70,000 दुर्लभ मछलियों को नदी के प्रवाह की विपरीत दिशा में तैरने में मदद मिली है। AI सिस्टम यह स्कैन करता है कि कौन सी प्रजातियों की मछलियां किस दिशा में जा रही हैं।


चीन के दावे और विशेषज्ञों की राय

इकोसिस्टम में सुधार का दावा
इस निगरानी प्रोजेक्ट के बारे में बांध के सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण निदेशक यांग शियाओचेंग का कहना है कि हाइड्रोपावर स्टेशन के निर्माण से मछलियों की आबादी में कमी नहीं आई है, बल्कि यह स्थिर है। उन्होंने यह भी कहा कि नदी के इस हिस्से में जलीय इकोसिस्टम में सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े बांध मछलियों के प्राकृतिक प्रवास को बाधित करते हैं, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


भारत के लिए चिंताएं

भारत की जल सुरक्षा पर प्रभाव
चीन का यह कदम भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यारलुंग त्सांगपो नदी तिब्बत से निकलकर अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के रूप में प्रवाहित होती है, और आगे चलकर असम में ब्रह्मपुत्र नदी बन जाती है। यह नदी करोड़ों लोगों के लिए जल का एक प्रमुख स्रोत है। भारत इस डैम प्रोजेक्ट और वहां हो रही गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहा है। भारतीय अधिकारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों को चिंता है कि नदी के ऊपरी हिस्से में बड़े बांधों के निर्माण से प्राकृतिक प्रवाह और तलछट की प्रक्रिया प्रभावित होगी, जिसका निचले इलाकों में पर्यावरणीय नुकसान और बाढ़ के पैटर्न में बदलाव के रूप में असर हो सकता है।