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चुनाव आयोग की बैठक में नाम काटने के मुद्दे पर चर्चा

चुनाव आयोग ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें नाम काटने के मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक में यह तय किया गया कि जिनके नाम काटे गए हैं, उनके फॉर्म इकट्ठा करने के लिए आयोग के कर्मचारी घर-घर जाएंगे। इसके अलावा, दावों और आपत्तियों की समय सीमा बढ़ा दी गई है। जानें इस बैठक में और क्या निर्णय लिए गए और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
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चुनाव आयोग की महत्वपूर्ण बैठक


नई दिल्ली में चुनाव आयोग ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें आयोग के कामकाज पर उठे सवालों और नाम काटने के आरोपों पर चर्चा की गई। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी उपस्थित थे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, उनके फॉर्म इकट्ठा करने के लिए आयोग के कर्मचारी घर-घर जाएंगे।


बैठक के बाद आयोग ने यह भी बताया कि जिनके नाम एसआईआर में काटे गए हैं, उनके दावे और आपत्तियों की समय सीमा बढ़ा दी गई है। जिन लोगों को नाम मैप न होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण नोटिस भेजा गया है, उनके लिए बीएलओ आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करेंगे और इन्हें चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। इन मामलों पर निर्णय लेने का कार्य रीजनल इलेक्टोरल अफसर करेगा।


इसके अतिरिक्त, बैठक में नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर व्यक्तियों के लिए हेल्प डेस्क या विशेष कैंप स्थापित करने का निर्णय लिया गया। एसआईआर के दौरान अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूची से 13.37 करोड़ नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, देश में कुल 96.88 करोड़ मतदाता हैं, जिससे लगभग 14.1 प्रतिशत मतदाताओं के नाम एसआईआर में काटे गए हैं।


मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों के बीच यह बैठक हुई। बैठक में यह भी तय किया गया कि दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। दिल्ली में विवाद का समाधान 30 नवंबर और महाराष्ट्र में 10 नवंबर तक किया जाएगा। गोवा में जिन मतदाताओं का नाम छूट गया है, वहां ब्लॉक अधिकारी घर-घर जाकर फॉर्म छह इकट्ठा करेंगे।


इसके अलावा, 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में फॉर्म छह में बिना सहमति के बदलाव करने की बात सामने आई है। इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म छह पर कोई विवाद नहीं है और इसे सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता दी है।