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चुनाव आयोग ने आंतरिक असहमति पर दी सफाई, कहा- यह सामान्य प्रक्रिया है

चुनाव आयोग ने हाल ही में आंतरिक असहमति पर स्पष्टीकरण दिया है, जिसमें कहा गया है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने पिछले एक साल में कई महत्वपूर्ण चुनाव सुधारों की जानकारी दी है। SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में बदलावों को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया गया है। आयोग ने यह भी बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा के लिए कड़े प्रोटोकॉल लागू हैं। जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
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चुनाव आयोग की आंतरिक असहमति पर स्पष्टीकरण


चुनाव आयोग ने आंतरिक असहमति पर दी जानकारी: मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया कई राज्यों में चल रही है, जिसके चलते राजनीतिक चर्चाएँ भी तेज हो गई हैं। इस प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी बीच, मीडिया में चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरें आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ निर्णयों पर आपत्ति जताई। आयोग ने इस पर एक प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान विभिन्न राय और सुझाव आना सामान्य है। सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।


ECI ने कहा- निर्णय में मतभेद नहीं

चुनाव आयोग ने अपने प्रेस नोट में बताया कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्य करता है। ECI एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है, जिसमें लिखित टिप्पणियाँ और तकनीकी सुझाव शामिल होते हैं। इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाना है। आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि ये सुझाव मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए होते हैं।


मीडिया रिपोर्ट में क्या कहा गया?

एक मीडिया रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई निर्णयों पर आपत्ति जताई। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। रिपोर्ट में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव का भी जिक्र है, जिसे नए मतदाता के पंजीकरण के लिए उपयोग किया जाता है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे।


पश्चिम बंगाल और गोवा का संदर्भ

रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित अपील दायर करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। गोवा में कुछ मतदाताओं के सॉफ्टवेयर प्रक्रिया से संबंधित मुद्दे भी सामने आए हैं। गोवा में 97 मतदाताओं को अंतिम सूची के लिए योग्य पाया गया, लेकिन सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव समय पर नहीं होने के कारण उन्हें अंतिम सूची में शामिल नहीं किया जा सका। चुनाव आयोग ने इन घटनाओं को आंतरिक टिप्पणियों का हिस्सा बताया है।


ECI ने कहा- एक साल में 40 नई पहल

चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ आंतरिक टिप्पणियों को सामने लाने से आयोग के कार्यों की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। आयोग ने पिछले एक साल में कई निर्णय और चुनाव सुधार किए हैं, जिनमें लगभग 40 नई पहलों का समावेश है। इनमें मतदाता सूची के पुनरीक्षण और SIR से जुड़े कार्य शामिल हैं। आयोग ने हाल में कराए गए चुनावों और उनसे जुड़े प्रशासनिक कार्यों का भी उल्लेख किया।


मतदाता डेटा की सुरक्षा पर स्पष्टीकरण

डिजिटल सिस्टम से संबंधित चिंताओं पर ECI ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिसमें ECINet भी शामिल है, कड़े डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं। आयोग ने कहा कि अनधिकृत छेड़छाड़ और डेटा में हेरफेर रोकने के लिए नियमित IT सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण होते हैं।