छतरपुर में चिता आंदोलन समाप्त, केन-बेतवा परियोजना पर विवाद जारी
छतरपुर में आंदोलन का अंत
छतरपुर: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में 16 दिनों से चल रहा चिता आंदोलन शनिवार को प्रशासन द्वारा समाप्त कर दिया गया। यह आंदोलन केन बेतवा परियोजना के तहत विस्थापन और अन्य मांगों को लेकर चल रहा था। सुबह लगभग 6 बजे, एडीएम विनय द्विवेदी और एएसपी आदित्य पाटले सहित अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में इस आंदोलन को समाप्त किया गया।
केन बेतवा लिंक परियोजना का परिचय
केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली प्रमुख नदी जोड़ने वाली योजना है। इसकी लागत लगभग ₹44,000 करोड़ है, जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी का अधिशेष जल उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित करना है। इससे बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों जैसे टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और झांसी को सिंचाई, पीने का पानी और बिजली की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना को पूरा करने के लिए 8 वर्षों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अधिकांश कार्य मार्च 2030 तक पूरा होना है। हालांकि, ग्रामीणों के विरोध के कारण कुछ स्थानों पर कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है।
विरोध के कारण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 7,000 परिवार विस्थापित होंगे। छतरपुर और पन्ना के स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी उचित मुआवजे, पुनर्वास (जमीन के बदले जमीन) और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने न्याय के लिए 'चिता आंदोलन' और जल सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन किए हैं।
आंदोलन का अंत
जानकारी के अनुसार, आंदोलनकारी रोज की तरह बराना नदी में सुबह 5 बजे उतरने लगे। कई लोग चिताओं पर लेट गए और कुछ ने सूली पर चढ़ने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। जैसे ही पुलिस और प्रशासन वहां पहुंचे, आंदोलनकारी नदी की ओर बढ़ने लगे। घंटों तक तनाव बना रहा, लेकिन प्रशासन ने उन्हें नदी से बाहर निकालने में सफलता पाई। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं को घटनास्थल से दूर किया।
आंदोलन के नेता की स्थिति
आंदोलन के नेता अमित भटनागर पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए प्रशासन को नदी में उतरना पड़ा, लेकिन तेज बहाव के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। अंततः, अमित को सहमति से एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल भेजा गया। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन की चाल थी कि उन्हें आंदोलन स्थल से हटाया गया।
स्वास्थ्य स्थिति
डॉक्टरों के अनुसार, अमित भटनागर को स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक चिकित्सा देखभाल के लिए अस्पताल लाया गया है। यह पूरा आंदोलन केन-बेतवा परियोजना में मुआवजे की मांग को लेकर चल रहा था।
