जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन: संसद मार्च की तैयारी में जुटे छात्र और विपक्षी दल
नई दिल्ली में CJP का आंदोलन
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहा काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ, सोमवार को संसद मार्च की घोषणा ने इस आंदोलन को नई दिशा दी है। इस प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए कई छात्र संगठन और विपक्षी दल सक्रिय हो गए हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की जा रही है, जिसका असर धरना स्थल पर बढ़ती भीड़ के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
दिल्ली में छात्रों की भारी भीड़
रविवार को, दिल्ली में तेज गर्मी और उमस के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र और युवा जंतर-मंतर पहुंचे। केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी लोग इस आंदोलन का हिस्सा बनने आए। सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो, पोस्ट और संदेश साझा किए जा रहे हैं, जिनमें युवाओं से आंदोलन में शामिल होने और संसद मार्च को सफल बनाने की अपील की जा रही है। धरना स्थल पर पहुंचे कई लोग आंदोलन को करीब से देखने और समझने के लिए आए। हालांकि, कुछ लोग थोड़ी देर रुकने के बाद वापस लौट गए। इसके बावजूद पूरे दिन लोगों का आना-जाना लगातार बना रहा।
संसद मार्च की तैयारियों में तेजी
सीजेपी की ओर से संसद मार्च का समय अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन संगठन के एक पदाधिकारी ने बताया कि सोमवार दोपहर किसी भी समय मार्च शुरू किया जा सकता है। इसे लेकर आंदोलन से जुड़े लोग पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं। 20 जून से शुरू हुए इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य नीट पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करना है। समय के साथ इस आंदोलन को कई छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिलता गया है।
छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन
धरने को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ), बिरसा आंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) और क्रांतिकारी युवा संगठन जैसे छात्र संगठनों का समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी आंदोलन में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। इससे धरना स्थल पर माहौल पहले की तुलना में अधिक सक्रिय नजर आ रहा है।
सोनम वांगचुक के हटने के बाद बढ़ी भीड़
28 जून से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार को स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस समय धरना स्थल पर बहुत कम लोग मौजूद थे, लेकिन इसके बाद आंदोलन ने फिर रफ्तार पकड़ ली। रविवार को पूरे दिन बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचते रहे। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद लोगों का समर्थन और बढ़ गया है।
अभिजीत दीपके ने संभाली अनशन की जिम्मेदारी
सोनम वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनशन की जिम्मेदारी संभाल ली है। वह मंच से लोगों को संबोधित करने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार वीडियो और संदेश साझा कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि संसद मार्च को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें और जरूरत पड़ने पर रातभर वहीं रुकें। इस अपील का असर भीड़ में साफ देखने को मिल रहा है।
गर्मी और उमस बनी चुनौती
धरना स्थल पर उमस भरी गर्मी के कारण प्रदर्शनकारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई और कुछ लोग बेहोश भी हो गए। ऐसे में कई प्रदर्शनकारी कुछ समय रुकने के बाद वापस लौटते दिखाई दिए। हालांकि, स्वयंसेवकों और सामाजिक संगठनों की ओर से पानी की बोतलों, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई। कई लोग हाथ वाले पंखों से एक-दूसरे को हवा करते नजर आए, ताकि गर्मी से कुछ राहत मिल सके। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे सोमवार को होने वाले संसद मार्च की तैयारियों में जुटे रहे।
