जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर अभिजीत दिपके के माता-पिता की प्रतिक्रिया
पुलिस कार्रवाई के बाद अभिजीत दिपके के माता-पिता की चिंता
जंतर-मंतर पर चलो संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के माता-पिता ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि वे उसे आंदोलन समाप्त करने के लिए नहीं कहेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा की।
अभिजीत दिपके के पिता का बयान
भगवान दिपके, अभिजीत के पिता, ने कहा कि उनके बेटे ने यह आंदोलन अपनी सोच और इच्छाओं के अनुसार शुरू किया है। इसलिए, उन्हें पीछे हटने की सलाह देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए था, लेकिन उनकी आवाज को दबाने के लिए बल का प्रयोग किया गया। उन्होंने सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए।
भावुक मां की प्रतिक्रिया
अभिजीत की मां, अनीता दिपके, ने भी पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि 18 से 20 साल के छात्र कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांगों पर चर्चा करने के बजाय, उन पर लाठीचार्ज किया गया, जो बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने प्रदर्शन का वीडियो देखा, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उनके अनुसार, सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए थी और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए था।
पिता ने सरकार के रवैये पर उठाए सवाल
भगवान दिपके ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्र शिक्षित और जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार, उन्होंने न तो हिंसा की और न ही किसी प्रकार का उपद्रव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद पुलिस ने बल का प्रयोग किया। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) से रिटायर्ड इंजीनियर भगवान दिपके ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि छात्रों के प्रदर्शन पर इस तरह की कार्रवाई होगी।
दिल्ली पुलिस का दावा
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि CJP के चलो संसद मार्च के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी उग्र हो गए थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया। पुलिस का दावा है कि उस दौरान 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उन्होंने निषोधाज्ञा का उल्लंघन किया। इस पूरे मामले में प्रदर्शनकारियों, पुलिस और सरकार के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
