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जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से भारी तबाही, उत्तराखंड और हिमाचल में भी बुरा हाल

जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन बादल फटने से बाढ़ आई है, जिससे कई इलाकों में तबाही मची है। उत्तराखंड में भी भारी बारिश के कारण बदरीनाथ हाईवे बंद रहा, जबकि हिमाचल प्रदेश में 46 सड़कों को बंद कर दिया गया है। मौसम विभाग ने विभिन्न राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है। जानें इस स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
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भारी बारिश से सड़कों पर आई तबाही


सड़कों पर आई बाढ़, प्राइवेट संपत्तियों को भी नुकसान


जम्मू-कश्मीर मौसम अपडेट: दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और तेजी से पूरे देश में फैल रहा है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि जुलाई के पहले सप्ताह के अंत तक यह पूरे देश को कवर कर लेगा। पिछले तीन दिनों से पहाड़ी राज्यों, विशेषकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे कई स्थानों पर गंभीर तबाही हो रही है। जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन बादल फटने से बाढ़ आ गई है और एक सड़क बह गई है।


उत्तराखंड और हिमाचल में भी स्थिति गंभीर

उत्तराखंड में खराब मौसम के कारण बदरीनाथ हाईवे 11 घंटे से अधिक समय तक बंद रहा, जिससे आठ हजार से अधिक श्रद्धालु रास्ते में फंसे रहे। हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश ने स्थिति को बिगाड़ दिया है, जहां बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण 46 सड़कों को बंद कर दिया गया है। मानसून की सक्रियता के कारण देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है।


मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने गुजरात, कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर 204.5 मिमी से अधिक वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, विदर्भ, ओडिशा और सौराष्ट्र-कच्छ में भारी बारिश की आशंका के चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बिहार, झारखंड, तेलंगाना, केरल और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।


उत्तराखंड में मलबा गिरने की घटनाएं

उत्तराखंड में कई स्थानों पर भारी बारिश जारी है। मौसम विभाग ने देहरादून और अन्य जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। बारिश के कारण बदरीनाथ हाईवे पर पगलानाला और गुलाबकोटी में मलबा गिर गया, जिससे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही 11 घंटे तक ठप रही। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर आठ हजार श्रद्धालु फंसे रहे। शाम को चार बजे के बाद वाहनों की आवाजाही सुचारु हो पाई, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।