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जम्मू में कांग्रेस का प्रदर्शन: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

कांग्रेस पार्टी ने जम्मू में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और स्वतंत्र समीक्षा की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस ने SIR और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। जानें इस विरोध की पूरी कहानी और कांग्रेस की मांगें।
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जम्मू में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन


कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। जम्मू में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कुमार के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। पार्टी ने 25 सितंबर को राज्य और जिला स्तर पर चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया था।


जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उग्र प्रदर्शन

जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। बैरिकेडिंग के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। पूर्व उपमुख्यमंत्री ताराचंद ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में ले जाया गया। कांग्रेस सांसद एवं पार्टी महासचिव डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया।


विधानसभा में भी कांग्रेस ने किया विरोध

शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी कांग्रेस विधायकों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग की। विधायकों ने हाथों में ऐसे बैनर लिए थे, जिन पर वोट और लोकतंत्र की रक्षा की अपील लिखी थी। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदन में बैनर लाने पर आपत्ति जताई और प्रदर्शनकारी सदस्यों से उन्हें हटाने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। बाद में कांग्रेस सदस्य अपनी सीटों पर लौट गए और प्रश्नकाल आगे बढ़ा।


SIR को लेकर कांग्रेस की क्या मांग है?

कांग्रेस का विरोध मुख्य रूप से SIR और मतदाता सूची से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर है। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के साथ उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। यह विवाद इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की एक जांच रिपोर्ट के बाद और बढ़ा, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नामों को हटाने और बहाल करने, Form 6 में बदलाव और चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे। हालांकि चुनाव आयोग ने सफाई दी कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग की ओर से कहा गया कि संस्थागत विचार-विमर्श में अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।