जलवायु परिवर्तन और ज्वार-भाटा: समुद्र के बदलते मिजाज
समुद्र के ज्वार-भाटे में बदलाव
दुनिया के विभिन्न हिस्सों में समुद्र का जल ज्वार-भाटे के दौरान अलग-अलग तरीके से ऊपर-नीचे होता है। कुछ स्थानों पर यह अंतर बहुत कम होता है, जबकि अन्य स्थानों पर यह 10 मीटर तक बढ़ सकता है, जो लगभग तीन मंजिला इमारत के बराबर है।
समुद्री ज्वार-भाटा तटरेखाओं और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है, तटीय समुदायों पर असर डालता है और अंटार्कटिका की बर्फीली चट्टानों के पिघलने में भी योगदान देता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि कुछ स्थानों पर ज्वार इतना अधिक और कुछ जगहों पर इतना कम क्यों होता है।
चंद्रमा और सूर्य का प्रभाव
चंद्रमा और सूर्य दोनों अपने गुरुत्वाकर्षण बल के माध्यम से पृथ्वी पर ज्वार उत्पन्न करते हैं। चंद्रमा, जो पृथ्वी के करीब है, का प्रभाव अधिक होता है। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण उसके दूर जाने पर कम होता है।
पृथ्वी का वह हिस्सा जो चंद्रमा के निकट है, वहां इसका प्रभाव अधिक होता है। यह अंतर पृथ्वी की ठोस सतह और महासागरों को खींचता है, जिससे समुद्र में ज्वार के दो उभार बनते हैं।
सूर्य का प्रभाव भी ज्वार पर पड़ता है, लेकिन यह चंद्रमा की तुलना में कम होता है। जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं, तो ज्वार का अंतर सामान्य से अधिक हो जाता है, जिसे 'स्प्रिंग टाइड' कहा जाता है।
गुरुत्वाकर्षण के अलावा अन्य कारक
तटीय क्षेत्रों में ज्वार मापने वाले उपकरणों और उपग्रहों से प्राप्त आंकड़े ज्वार की सरल तस्वीर से भिन्न हैं। महाद्वीप महासागरों को अलग-अलग बेसिन में बांट देते हैं, जिससे समुद्री जल इन बेसिनों के भीतर आगे-पीछे होता है।
कुछ महासागरीय बेसिन में ज्वार ऐसे बिंदुओं के आसपास घूमता है जहां जलस्तर में बदलाव लगभग नहीं होता। इन्हें 'एम्फिड्रोमिक पॉइंट' कहा जाता है।
तटरेखा का आकार भी ज्वार को प्रभावित कर सकता है। जब खाड़ी में पानी के आगे-पीछे हिलने की लय स्थानीय ज्वार की लय से मेल खाती है, तो ज्वार का अंतर बढ़ जाता है।
समुद्र के नीचे मौजूद पहाड़ और पर्वत श्रृंखलाएं भी ज्वार को प्रभावित करती हैं। जब ज्वार का पानी असमतल समुद्री तल के ऊपर से गुजरता है, तो उसकी ऊर्जा समुद्र में तरंगों में बदल जाती है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
सर आइजैक न्यूटन ने 1687 में गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से ज्वार-भाटे की व्याख्या की थी। आज भी वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ज्वार कैसे बदल रहा है।
जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और तटरेखाएं बदल रही हैं। इन बदलावों का ज्वार के आकार पर असर पड़ सकता है।
तटीय समुदायों के लिए ज्वार में इन बदलावों को समझना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भविष्य में ज्वार में होने वाले बदलावों का बेहतर अनुमान लगाने से तटीय समुदायों को बाढ़ के लिए तैयारी करने में मदद मिल सकती है।
