जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, संसद की जांच समिति ने आरोपों को सही माना
जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जांच
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की पुष्टि संसद की जांच समिति ने की है। उनके खिलाफ तीन आरोप लगाए गए थे, और समिति ने सभी को सही पाया है। इस रिपोर्ट का उपयोग संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया में किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जस्टिस वर्मा को दिल्ली से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था, और हाल ही में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
यह मामला 2025 में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से संबंधित है। होली के बाद आग लगने की सूचना पर फायर ब्रिगेड की टीम वहां पहुंची थी, जहां उन्हें नोटों से भरा एक बोरा मिला। इस घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक समिति का गठन किया था, जिसने नकदी मिलने की पुष्टि की। जब संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया, तो जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर ने जांच समिति का गठन किया।
संसद की जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टोररूम में पांच सौ रुपए के नोटों की एक बड़ी मात्रा पाई गई थी। हालांकि, जस्टिस वर्मा नकदी के स्रोत, स्वामित्व या वहां मौजूद होने का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि फायर सर्विस और पुलिस के कर्मचारियों ने जांच के दौरान बताया कि नोट केवल एक स्थान पर नहीं थे, बल्कि स्टोररूम के बड़े हिस्से में फैले हुए थे।
शुरुआत में जस्टिस वर्मा ने कहा कि उन्हें नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बाद में उन्होंने दावा किया कि नकदी नकली थी और इसे साजिश के तहत रखा गया था। लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत या एफआईआर पेश नहीं की गई। जस्टिस वर्मा ने खुद भी गवाही नहीं दी और न ही अपने परिवार या स्टाफ को गवाह के रूप में पेश किया। इस कारण समिति ने जस्टिस वर्मा की सफाई को अधूरी और भ्रामक माना।
