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जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जांच में मिली पुष्टि

जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीन आरोपों की जांच में संसद की समिति ने पुष्टि की है। 2025 में उनके सरकारी आवास पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्टोर रूम में ₹500 के नोटों के बंडल पाए गए थे, और सबूतों को सुरक्षित रखने में लापरवाही की गई। जस्टिस वर्मा ने आरोपों का खंडन किया, लेकिन समिति ने उनकी सफाई को अधूरी माना। जानें पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में।
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जांच समिति की रिपोर्ट में तीन आरोपों की पुष्टि

नई दिल्ली। संसद की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगाए गए तीनों आरोपों को सही पाया है। यह मामला 2025 में उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से संबंधित है। समिति की रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्तुत की गई। स्टोर रूम में ₹500 के नोटों के कई बंडल पाए गए थे। जांच के दौरान उपस्थित फायर सर्विस और पुलिसकर्मियों ने बताया कि नकदी एक ही स्थान पर नहीं थी, बल्कि कमरे के बड़े हिस्से में फैली हुई थी। दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने समिति को बताया कि उन्होंने ₹500 के नोटों के बंडल देखे थे, जो लगभग 7-8 फीट तक फैले हुए थे।


जब पुलिस अधिकारी रूपचंद से नकदी की मात्रा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ₹5 लाख का आंकड़ा बहुत छोटा है। हालांकि, मौके से बरामद नोटों को न तो जब्त किया गया, न उनकी गिनती हुई और न ही उनके नमूने सुरक्षित किए गए। इस कारण समिति यह तय नहीं कर सकी कि कुल कितनी नकदी थी। फिर भी, समिति ने घर में बेहिसाब नकदी मिलने के आरोप को सही माना।


जांच में दूसरा गंभीर मामला सबूतों से संबंधित था। आग लगने के बाद स्टोर रूम को तुरंत सील नहीं किया गया। एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि रात करीब 3 बजे जस्टिस वर्मा के स्टाफ को कमरे की सफाई करते देखा गया। सुबह तक जले हुए सामान को बाहर निकाल दिया गया और कमरे की सफाई भी हो चुकी थी।


समिति के अनुसार, वहां मिले नोटों को सुरक्षित नहीं किया गया और बाद में वे नहीं मिले। जांच पैनल ने माना कि इस दौरान महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने में लापरवाही हुई और उनसे छेड़छाड़ की स्थिति बनी। इस आरोप को भी समिति ने सही पाया।


तीसरे आरोप में जस्टिस वर्मा के बयानों पर सवाल उठाए गए। शुरुआत में उन्होंने नकदी के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। बाद में उन्होंने दावा किया कि नकदी नकली हो सकती है या फिर किसी साजिश के तहत वहां रखी गई होगी। लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई FIR, शिकायत या ठोस सबूत सामने नहीं आया।


जांच समिति के सामने जस्टिस वर्मा खुद भी गवाही देने नहीं पहुंचे। उनके परिवार या स्टाफ की ओर से भी किसी को गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया। समिति ने उनकी सफाई को अधूरी और टालमटोल वाली बताया और माना कि उनके जवाब भ्रामक प्रभाव पैदा करते हैं।


इस प्रकार, जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है। जस्टिस वर्मा इस साल अप्रैल में हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे चुके हैं।