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जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर छात्रों का विरोध जारी

दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा के बावजूद छात्रों का विरोध जारी है। छात्रों ने चुनाव की तारीख की स्पष्टता की मांग की है और प्रशासन पर ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। पिछले दो हफ्तों से चल रहे इस आंदोलन में छात्रों ने भूख हड़ताल भी की है। जानें इस मुद्दे पर छात्रों की प्रमुख मांगें और प्रशासन की प्रतिक्रिया।
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छात्र संघ चुनाव की घोषणा के बावजूद विरोध

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने छात्र संघ चुनाव कराने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, इस घोषणा के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। सोमवार को छात्रों और अर्धसैनिक बलों के बीच झड़पें हुईं।


पिछले दो हफ्तों से जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध प्रदर्शन जारी है, जिसके कारण सभी कक्षाएं ऑनलाइन चल रही हैं। सोमवार को भी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, लेकिन प्रदर्शनकारियों को परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। झड़प के बाद कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया है और परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को जारी कारण बताओ नोटिस और निलंबन आदेश वापस ले लिया है। इसके साथ ही एक समिति का गठन किया जाएगा, जो छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच व्यवहार की जांच करेगी।


प्रदर्शनकारियों की मांगें

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें


प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने चुनाव की तारीख का कोई स्पष्ट ऐलान नहीं किया है। 12 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे रेहान खान ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह उनकी मांगों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र संघ की बहाली और चुनाव की तारीखों का ऐलान उनकी प्रमुख मांग है।



रेहान खान ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिस हमारी मांगों से ध्यान भटकाने का प्रयास है, लेकिन जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम पीछे नहीं हटेंगे।'


उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन ने उन्हें बताया था कि 20 दिसंबर तक छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार हो जाएगा, जिसके बाद इसे मंजूरी दी जाएगी और 15 दिनों के भीतर चुनाव की घोषणा की जाएगी। रेहान ने सवाल उठाया कि यदि 20 दिसंबर तक संविधान का मसौदा तैयार हो भी जाता है, तो प्रशासन की मंजूरी की क्या गारंटी है। उन्होंने चुनाव की तारीख की घोषणा की मांग की।