जैन संत आचार्य लोकेश मुनि को खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण
आचार्य लोकेश मुनि का ईरान यात्रा
नई दिल्ली: जैन संत और अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण प्राप्त हुआ है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। यह कार्यक्रम 4 और 5 जुलाई को तेहरान में आयोजित होगा।
जैन मुनि ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर निमंत्रण पत्र साझा करते हुए लिखा, "ईरान सरकार के आमंत्रण पर शांतिदूत जैन आचार्य लोकेशजी अमेरिका से तेहरान पहुंचेंगे। आचार्य 3 जुलाई 2026 को तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसाल्ला कॉम्प्लेक्स में अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।"
इस पोस्ट में बताया गया है कि जैन मुनि वर्तमान में अमेरिका में हैं। इसमें आगे कहा गया, "अमेरिका की शांति सद्भाव यात्रा के दौरान गुरुदेव के 'वी सपोर्ट पीस' अभियान को रिपब्लिक और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के नेताओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला है, जिसके चलते उनकी तत्काल ईरान यात्रा वैश्विक शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।"
ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय द्वारा भेजे गए निमंत्रण पत्र में उल्लेख किया गया है, "भारत-ईरान के ऐतिहासिक रिश्तों को देखते हुए आचार्य लोकेश मुनि की उपस्थिति दोनों देशों के बीच गहरे सम्मान और मित्रता का प्रतीक होगी।"
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, अंतिम संस्कार में 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस कारण पूरे तेहरान में सुरक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए हैं। शहर में कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही भी सीमित रहेगी।
भारत सरकार का प्रतिनिधित्व बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा करेंगे।
36 वर्षों तक इस्लामिक रिपब्लिक के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी को यूएस-इजरायल हमले में हुआ था। यह घटना तेहरान पर हवाई हमलों के पहले दिन हुई थी। खामेनेई ने लंबे समय तक ईरान की राजनीति और शासन व्यवस्था को दिशा दी।
ईरानी मीडिया के अनुसार, अंतिम संस्कार की तैयारियों में कई बड़े धार्मिक आयोजन शामिल हैं। 7 जुलाई को पवित्र शहर कॉम में भी समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जहां खामेनेई का जन्म हुआ था।
