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झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन: राजनीतिक जगत में शोक की लहर

झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हार्ट अटैक से हुआ। उनकी आकस्मिक मृत्यु ने झारखंड के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ा दी है। सोनू ने 2019 और 2024 में विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई थी। उनके निधन से झामुमो को बड़ा झटका लगा है, और पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा शोक है। जानें उनके जीवन और राजनीतिक सफर के बारे में।
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सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन


नई दिल्ली: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता और राज्य के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया है। जानकारी के अनुसार, बीती रात गिरिडीह में अपने घर पर सोते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें हार्ट अटैक आने की सूचना मिली है। परिजनों और समर्थकों ने तुरंत उन्हें गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों की सभी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।


अस्पताल में जुटे समर्थक और अधिकारी

सुदिव्य कुमार सोनू की तबीयत बिगड़ने की खबर सुनते ही बड़ी संख्या में परिजन, समर्थक और झामुमो कार्यकर्ता अस्पताल पहुंच गए। प्रशासन के अधिकारी भी वहां स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें रांची ले जाना संभव नहीं हो पाया।




उनके निधन की सूचना मिलते ही झारखंड के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके आकस्मिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। झामुमो ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से शोक प्रकट किया।


सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर

सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह सदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। उन्होंने 2019 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने सफलता प्राप्त की। लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद सौंपा गया।


मंत्री के रूप में उनके पास पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य, नगर विकास और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे। वह सरकार की ओर से छात्रों, भर्ती और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्यरत थे।


हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगी

सुदिव्य कुमार सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगियों में गिना जाता था। गिरिडीह की राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ थी। विधायक से मंत्री बनने तक का उनका सफर क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना गया।


उनके अचानक निधन से झामुमो को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच गहरा शोक है। उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।