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टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन: एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा

टाटा समूह में हाल के दिनों में नेतृत्व परिवर्तन की लहर चल रही है। एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया है, जबकि विजय सिंह पहले ही टाटा ट्रस्ट से हट चुके हैं। चंद्रशेखरन का इस्तीफा टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति न बनने के कारण हुआ है। इस बदलाव का असर टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है। जानें इस इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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टाटा समूह में बदलाव की लहर


नई दिल्ली: टाटा समूह में हाल के दिनों में कई प्रमुख बदलाव देखने को मिल रहे हैं। टाटा ट्रस्ट से विजय सिंह के इस्तीफे के बाद, अब टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा उन्होंने 12 अगस्त को दिया, जबकि टाटा संस की वार्षिक आम बैठक 18 अगस्त को होने वाली है। हालांकि, चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 तक जारी रहेगा।


सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए व्यवसायों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेदों के कारण यह स्थिति बनी। चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद, टाटा समूह की कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, जिसमें टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर तीन प्रतिशत तक नीचे गिरे।


अपने इस्तीफे में चंद्रशेखरन ने कहा, 'मेरे वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति 20 फरवरी 2027 को होनी है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी। इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने स्वीकार किया था।'


उन्होंने आगे कहा, 'हालांकि, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था, लेकिन एक सदस्य के समर्थन न मिलने के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इस वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना।' चंद्रशेखरन ने यह भी बताया कि बोर्ड मीटिंग के छह महीने बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि टाटा संस एक बड़ा संस्थान है और कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाएं अभी भी महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं।