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टीएमसी में बगावत: 20 सांसदों ने NDA का समर्थन किया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हाल ही में एक बड़ी बगावत देखने को मिली है, जिसमें 20 लोकसभा सांसदों ने NDA का समर्थन करने का निर्णय लिया है। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस बात की पुष्टि की है। महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर गुस्सा जाहिर करते हुए उन्हें लालची और गद्दार कहा है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद आया है, जब ममता बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में भाग ले रही थीं। जानें इस राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे की कहानी।
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टीएमसी में बगावत: 20 सांसदों ने NDA का समर्थन किया

टीएमसी में टूट का नया अध्याय

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। हाल ही में पार्टी के 58 विधायकों के बागी होने के बाद, अब 20 लोकसभा सांसद भी पार्टी छोड़ने का निर्णय ले चुके हैं। टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने जानकारी दी है कि इन सांसदों ने केंद्र में सत्तारूढ़ NDA का समर्थन करने का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में औपचारिक सूचना लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र के माध्यम से दी जाएगी।


ममता बनर्जी की पार्टी में फूट

इस बगावत के साथ ही ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की संसदीय इकाई में दरार आ गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से ममता का नियंत्रण कमजोर होता जा रहा है।


महुआ मोइत्रा का गुस्सा

इस घटनाक्रम के बाद टीएमसी की प्रमुख सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने इन सांसदों को लालची और गद्दार करार देते हुए कहा कि उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए और फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर अपनी क्षमता साबित करनी चाहिए।


महुआ का बयान

'सांसद 2024 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। जनादेश NDA के लिए नहीं था। सभी लालची और मतलबी गद्दार अब बीजेपी में शामिल हो जाएं। सभी अपनी सीटों से इस्तीफा दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें। देखते हैं आप कितने बड़े हीरो हैं,' महुआ ने कहा।


इंडिया गठबंधन की बैठक के बीच फूट

यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस की हार के कुछ दिनों बाद सामने आया है। पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के निर्णय को खारिज कर दिया और निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी को उस पद पर नियुक्त किया।


विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से टीएमसी में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही थी, जो अब उसके संसदीय खेमे में भी फैल गई है। जब यह बगावत हुई, तब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए इंडिया गठबंधन की बैठक में दिल्ली में थीं।