ट्रांसपोर्टर पर 9.86 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप, फर्जी डेबिट नोट का मामला
गुरुग्राम में धोखाधड़ी का मामला
फर्जी डेबिट नोट का मामला - मानेसर में ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले प्रवीण पर एक व्यक्ति से 9.86 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि सेक्टर-7 आईटीएमटी मानेसर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। शिकायतकर्ता दर्शन सिंह, जो पाथेड़ा, जिला महेंद्रगढ़ के निवासी हैं, ने पुलिस उपायुक्त मानेसर को अपनी शिकायत में बताया कि उनकी प्रवीण से 6-7 साल की जान-पहचान थी।
प्रवीण, जो श्री श्याम ट्रांसपोर्ट सर्विस के तहत मानेसर में काम करता है, ने दर्शन सिंह से अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 तक अपने रिश्तेदार की चार पिकअप गाड़ियों को कुल बिल का पांच प्रतिशत कमीशन पर चलवाया था। दर्शन ने बताया कि अक्टूबर 2024 में पहली गाड़ी एनआईटी एक्सप्रेस, जेप्टो, फस्र्ट सिटी कंपनी में लगाई थी। इसके बाद प्रवीण के कहने पर 14 अक्टूबर 2024 को तीन और गाड़ियाँ भेजी गईं।
गाड़ी भेजने में अनियमितताएँ
27 जनवरी 2025 को एक गाड़ी फरुखनगर से दो पॉइंट का माल लोड कर गाजियाबाद गई थी। ड्राइवर ने एक पॉइंट पर माल खाली कर साथी के साथ मिलकर गाड़ी लेकर भाग गया। इस पर थाना कवि नगर गाजियाबाद में 6 फरवरी 2025 को एफआईआर दर्ज कराई गई। एक फरवरी 2025 को गाड़ी उत्तर प्रदेश के करेली से खाली हालत में बरामद हुई। चोरी की घटना के बाद, 15 फरवरी 2025 से तीनों गाड़ियों को प्रवीण को किस्त और अन्य खर्च की शर्त पर दे दिया गया।
दर्शन सिंह ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2024 से 15 फरवरी 2025 तक का हिसाब और कानूनी एग्रीमेंट के लिए कई बार कहा, लेकिन प्रवीण बहाने बनाकर टालता रहा। 16 जुलाई 2025 को प्रवीण ने व्हाट्सएप पर मैसेज कर गाड़ियों को वापस लेने को कहा। दर्शन ने बकाया किस्त और हिसाब करने पर गाड़ी लेने की बात कही। 31 जुलाई 2025 को प्रवीण ने जबरन एक गाड़ी भेजी, जिसमें स्टेपनी, जैक और आरसी नहीं थी।
फर्जी डेबिट नोट का खुलासा
किस्त भरने का आश्वासन देकर गाड़ी खड़ी कर दी गई। दो दिन तक किस्त न भरने पर दर्शन ने 2/3 अगस्त 2025 की रात को गाड़ी के ड्राइवर से लेकर वापस ले ली। बार-बार कहने पर 14 फरवरी 2026 को प्रवीण ने हिसाब किया और ऊर्जा कंपनी का 9,86,192 रुपये का डेबिट नोट दिया। जब दर्शन ने ऊर्जा के गुरुग्राम और पुणे ऑफिस से जांच कराई, तो पता चला कि यह डेबिट नोट फर्जी है। कंपनी ने बताया कि वह इस तरह का कोई डेबिट नोट जारी नहीं करती और यह वित्तीय वर्ष 2024-25 का है। शिकायत में दर्शन ने कहा कि प्रवीण पहले भी कई लोगों से जालसाजी कर चुका है। पुलिस उपायुक्त कार्यालय से जांच के आदेश के बाद 25 जून 2026 को थाना सेक्टर-7 मानेसर में केस दर्ज किया गया। जांच अधिकारी नरेंद्र ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है।
