ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत: CBI ने पति और सास पर लगाए गंभीर आरोप
CBI ने चार्जशीट दाखिल की
नई दिल्ली: पूर्व मिस पुणे और मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत में चार्जशीट पेश की है। इस चार्जशीट में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है। उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज से संबंधित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। CBI की चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 80(2), 85, 108 और 3(5) के तहत आरोप शामिल हैं, जिनमें आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना के प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
ट्विशा की शादी और संदिग्ध मौत
ट्विशा शर्मा की शादी नवंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी। समर्थ की मां गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश में जिला जज के पद से रिटायर हुई थीं। शादी के लगभग छह महीने बाद, 12 मई 2026 को, ट्विशा अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोश पाई गईं। परिवार ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण फांसी बताया गया था। इसके बाद, ट्विशा के परिवार ने मौत की परिस्थितियों और दहेज प्रताड़ना को लेकर सवाल उठाए।
परिवार के आरोप और पुलिस की लापरवाही
परिवार ने लगाए प्रताड़ना के आरोप
ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा और परिवार ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा था। परिवार ने यह भी कहा कि प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में शरीर पर मौजूद चोटों को नजरअंदाज किया गया और प्रभावशाली परिवार होने के कारण पुलिस ने सही तरीके से जांच नहीं की। वहीं, गिरिबाला सिंह ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि ट्विशा मानसिक बीमारी और ड्रग्स की लत से परेशान थीं। ट्विशा के परिवार ने इन दावों को खारिज कर दिया।
CBI जांच में सामने आई पुलिस की लापरवाही
FIR दर्ज करने में देरी, पुलिस की जांच और आरोपी पति के फरार रहने के कारण मध्य प्रदेश सरकार ने मामले को CBI को सौंप दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया। इसके बाद AIIMS के डॉक्टरों के पैनल ने ट्विशा का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। CBI की जांच में पुलिस की कार्रवाई में कई खामियां उजागर हुईं। जांच के दौरान यह पता चला कि जिस बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही गई थी, उसे पोस्टमॉर्टम के समय जांच के लिए नहीं भेजा गया था। इसके जब्ती से संबंधित दस्तावेजों पर गवाहों के हस्ताक्षर भी नहीं थे। इस लापरवाही के लिए एक पुलिस अधिकारी पर जुर्माना लगाया गया था।
