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डायबिटीज के मरीजों के लिए घाव भरने की नई खोज

डायबिटीज के मरीजों के लिए एक साधारण घाव भी गंभीर समस्या बन सकता है। हाल ही में एक अध्ययन ने बताया है कि इम्यून सेल्स की हाइपर-इंफ्लेमेटरी स्थिति घाव भरने में बाधा डालती है। वैज्ञानिकों ने 'रीप्रोग्रामिंग थेरेपी' पर काम शुरू किया है, जो मरीजों को पैर या उंगलियां गंवाने के खतरे से बचा सकती है। जानें इस नई चिकित्सा के बारे में और मरीजों को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए।
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डायबिटिक फुट अल्सर: गंभीर समस्या

नई दिल्ली: डायबिटीज से ग्रसित व्यक्तियों के लिए एक साधारण खरोंच या छाला भी गंभीर समस्या बन सकता है। इसे मेडिकल भाषा में 'डायबिटिक फुट अल्सर' कहा जाता है। कई बार, संक्रमण इतना बढ़ जाता है कि डॉक्टरों को मरीज की जान बचाने के लिए पैर या उंगलियों को काटने का निर्णय लेना पड़ता है। पहले यह माना जाता था कि केवल उच्च रक्त शर्करा और खराब रक्त संचार ही घाव भरने में बाधा डालते हैं, लेकिन हाल ही में 'साइंस डेली' में प्रकाशित एक अध्ययन ने इसके पीछे के जैविक कारणों को स्पष्ट किया है।


इम्यून सेल्स की भूमिका

इम्यून सेल्स का 'हाइपर-इंफ्लेमेटरी' लॉक होना है असली जड़
रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में इम्यून सेल्स एक खतरनाक स्थिति में फंस जाते हैं। अनियंत्रित रक्त शर्करा और विषैले फ्री-रेडिकल्स के कारण घाव का आंतरिक वातावरण इतना जहरीला हो जाता है कि 'मैक्रोफेज' सेल्स हाइपर-इंफ्लेमेटरी मोड में लॉक हो जाते हैं। सामान्य परिस्थितियों में, इम्यून सेल्स संक्रमण से लड़ने के बाद घाव भरने की प्रक्रिया में लग जाते हैं, लेकिन डायबिटीज में ये लगातार हानिकारक रसायन छोड़ते रहते हैं, जिससे स्वस्थ ऊतकों को नुकसान होता है। इस कारण बाहरी एंटीबायोटिक क्रीम या पट्टियों का असर नहीं होता।


रीप्रोग्रामिंग थेरेपी: एक नई उम्मीद

क्या है 'रीप्रोग्रामिंग थेरेपी'
इस महत्वपूर्ण खोज के आधार पर वैज्ञानिकों ने 'रीप्रोग्रामिंग थेरेपी' पर काम करना शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया में विशेष दवाएं, जैल और मॉलिक्यूल्स विकसित किए जा रहे हैं, जो घाव पर लगाने पर फंसे हुए मैक्रोफेज सेल्स को रीप्रोग्राम कर सकें। यह इम्यून सेल्स को संकेत देगा कि सूजन पैदा करना बंद करें और घाव को स्वाभाविक रूप से भरने दें। यदि यह थेरेपी क्लिनिकल ट्रायल्स में सफल होती है, तो लाखों डायबिटिक मरीजों को पैर या उंगलियां गंवाने के खतरे से बचाया जा सकेगा।


डायबिटिक मरीजों के लिए सावधानियाँ

डायबिटिक मरीज रखें इन जरूरी सावधानियों का ध्यान
वैज्ञानिकों और चिकित्सकों का सुझाव है कि नई थेरेपी के आने तक मरीजों को अपने पैरों की नियमित देखभाल करनी चाहिए। रोजाना पैरों के तलवों की जांच करें कि कहीं कोई लाल निशान, छाला या कट तो नहीं है। घर के अंदर नंगे पैर चलने से बचें और हमेशा आरामदायक स्लिपर्स या प्रमाणित डायबिटिक फुटवियर पहनें। इसके अलावा, खानपान और दवाइयों के माध्यम से रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित रखें और अपने HbA1c स्तर को 7 से नीचे रखने का प्रयास करें।