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डिजिटल भुगतान और विदेशी निवेश में बदलाव के लिए नए कानूनों की मंजूरी

भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली और विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए नए कानूनों को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दी गई है। इन कानूनों के तहत UPI और RuPay जैसे भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की शक्ति सरकार को दी गई है। हालांकि, आम उपयोगकर्ताओं के लिए UPI भुगतान फिलहाल मुफ्त रहेगा। इसके अलावा, विदेशी कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में कर छूट भी दी गई है। जानें इन नए कानूनों के बारे में और कैसे ये भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
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नई दिल्ली में महत्वपूर्ण कानूनों की स्वीकृति


नई दिल्ली: भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली और विदेशी निवेश से संबंधित नियमों में संशोधन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 और Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन के लिए कानून को स्वीकृति दी है। ये विधेयक अगस्त में संसद द्वारा पारित किए गए थे। नए नियमों में UPI और RuPay जैसे भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की शक्ति, विदेशी पूंजी को प्रोत्साहित करने और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए कर राहत जैसे प्रावधान शामिल हैं।


कानून मंत्रालय की जानकारी

कानून मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति ने 17 अगस्त 2026 को इन दोनों कानूनों को मंजूरी दी। संसद ने संबंधित विधेयक 10 अगस्त को पारित किए थे। डिजिटल भुगतान से जुड़े संशोधन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसके माध्यम से सरकार अधिसूचना द्वारा यह निर्धारित कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लागू होगा और किन्हें इससे छूट मिलेगी।


क्या UPI पर शुल्क लगेगा?

नए कानून का अर्थ यह नहीं है कि UPI भुगतान पर तुरंत शुल्क लागू होगा। संशोधन ने सरकार को भविष्य में अधिसूचना के माध्यम से शुल्क व्यवस्था तय करने का अधिकार दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए UPI भुगतान फिलहाल मुफ्त रहेगा और शुल्क कुछ विशेष कारोबारी लेनदेन तक सीमित रखा जा सकता है।


MDR में संभावित बदलाव

Merchant Discount Rate यानी MDR डिजिटल भुगतान प्रक्रिया में व्यापारियों से जुड़ा शुल्क है। पुराने नियमों के तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाता शुल्क नहीं लगा सकते थे। संशोधन के बाद, सरकार अधिसूचना के माध्यम से यह तय कर सकेगी कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम शुल्क से मुक्त रहेंगे। इसका मतलब है कि भविष्य में कुछ श्रेणियों के कारोबारी लेनदेन पर MDR लागू करने की कानूनी गुंजाइश बन गई है।


विदेशी निवेश और इलेक्ट्रॉनिक्स में राहत

कराधान कानून में बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशी कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से संबंधित है। विदेशी कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के अनुबंध निर्माण से जुड़ी कर छूट वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ाई गई है। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और संबंधित कलपुर्जे शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य भारत में उत्पादन और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है।


5 जून के अध्यादेश का स्थान

नया कानून 5 जून 2026 को जारी Income-tax (Amendment) Ordinance की जगह आया है। उस अध्यादेश में सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों की ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट जैसे प्रावधान शामिल थे। नए कानून में विदेशी कंपनियों के लिए भारत में डेटा सेंटर सेवाओं के उपयोग को सरल बनाने और इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने से जुड़े प्रावधान भी हैं।