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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर नया रुख: आर्थिक दबाव का सहारा

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने रुख में बदलाव करते हुए सैन्य हमलों के बजाय आर्थिक दबाव का सहारा लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने ईरान की खराब आर्थिक स्थिति और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के प्रभावों पर चर्चा की। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच केवल आंशिक बातचीत चल रही है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए बातचीत अंतिम चरण में पहुंच रही है। जानें इस मुद्दे पर ट्रंप के विचार और ईरान की प्रतिक्रिया।
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ट्रंप का बदलता दृष्टिकोण

ट्रंप ने ईरान पर महीनों तक बमबारी के बाद अपना रुख बदलते हुए कहा है कि अमेरिका अब सैन्य हमलों के बजाय आर्थिक दबाव का उपयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से लागू अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।


संयम बरतने की बात

ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा, "हम इस मामले में संयम बरत रहे हैं।" उन्होंने कहा कि अमेरिका और तेहरान के बीच केवल आंशिक बातचीत चल रही है और वे यह देख रहे हैं कि युद्ध का ईरान की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है।


ईरान की आर्थिक स्थिति

उन्होंने ईरान की आर्थिक स्थिति को 'बहुत खराब' बताया, जिसमें महंगाई और सेना के लिए धन की कमी का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत

ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब ओमान की मध्यस्थता में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए बातचीत अंतिम चरण में पहुंच रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वे नए शिपिंग रूट के लिए आवश्यक समझौतों के करीब हैं।


तेहरान की शर्तें

तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह तब तक जलमार्ग को नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका अपने व्यवहार में सुधार नहीं करता। इसमें नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना और सैन्य कार्रवाई रोकना शामिल है।