ड्रोन तकनीक से पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का नया निर्णय
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आगामी धान कटाई के मौसम में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के खेतों की निगरानी ड्रोन के माध्यम से की जाएगी। आयोग ने 28 जुलाई 2026 को चारों राज्यों के मुख्य सचिवों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और 14 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग प्रदूषण नियंत्रण में अधिक प्रभावी साबित होगा।
ड्रोन से मिलेगी सटीक जानकारी
अब तक पराली जलाने की घटनाओं का पता मुख्य रूप से सैटेलाइट तस्वीरों से लगाया जाता था। लेकिन अधिकारियों के अनुसार, कई किसान दिन के बाद या रात में आग लगाते थे, जिससे कई घटनाएं रिकॉर्ड नहीं हो पाती थीं। नई व्यवस्था में ड्रोन तुरंत धुएं और आग का पता लगाएंगे, साथ ही खेत की जियो-टैगिंग, फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कर अधिकारियों को वास्तविक समय में जानकारी देंगे, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष मई में पंजाब के पटियाला जिले में ड्रोन निगरानी का एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। इस दौरान ड्रोन से प्राप्त उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरों की मदद से पराली जलाने वाले खेतों की सटीक पहचान की गई और संबंधित स्थानों पर त्वरित कार्रवाई की गई। इसी सफल प्रयोग के आधार पर अब पूरे क्षेत्र में ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है।
ड्रोन में आधुनिक तकनीकी सुविधाएं
CAQM ने निर्देश दिया है कि सभी ड्रोन Drone Rules, 2021 के अनुसार संचालित किए जाएंगे। इनमें GNSS आधारित पोजिशनिंग, जियोफेंसिंग, उच्च-रिजॉल्यूशन कैमरे और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी। रिकॉर्ड किए गए फोटो और वीडियो कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखे जाएंगे। इसके अलावा, सभी राज्यों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करने के लिए एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा और लाइव फीड CAQM के Integrated Command and Control Centre (ICCC) से साझा की जाएगी।
जागरूकता पर भी जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करना भी है। इसके लिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के बारे में जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी निगरानी और जागरूकता अभियान के संयुक्त प्रयासों से इस बार पराली जलाने की घटनाओं में और अधिक कमी लाई जा सकेगी।
