तमिलनाडु का अनोखा कदम: देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय SC से बाहर निकलने की मांग कर रहा है
समुदाय की अनोखी मांग
नई दिल्ली: देश में कई जातियां आरक्षण की सूची में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं तमिलनाडु का देवेंद्रकुला वेल्लालर (DKV) समुदाय इसके विपरीत एक अनोखी मांग कर रहा है। यह समुदाय अनुसूचित जाति (SC) की सूची से बाहर निकलने की इच्छा व्यक्त कर रहा है।
मामला कैसे सामने आया
यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला पर SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। तेनकासी के भाजपा जिलाध्यक्ष अनंतन अय्यासामी, जो इसी समुदाय से हैं, ने इसका विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय ने तय किया है कि वे SC/ST कानून का उपयोग नहीं करेंगे, क्योंकि इससे समाज में नफरत और दुश्मनी बढ़ती है।
देवेंद्रकुला वेल्लालर कौन हैं?
यह समुदाय तमिलनाडु की SC जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 5 से 9 प्रतिशत है। ये मुख्य रूप से दक्षिणी तमिलनाडु और कावेरी डेल्टा के मदुरै, रामनाथपुरम, तिरुनेलवेली, और थूथुकुडी जिलों में निवास करते हैं। 'देवेंद्रकुला' का अर्थ है भगवान इंद्र के वंशज, और 'वेल्लालर' कृषि से संबंधित है। मार्च 2021 में, संसद ने पल्लार सहित सात उप-जातियों को मिलाकर इसे देवेंद्रकुला वेल्लालर नाम दिया था।
SC से बाहर निकलने की वजह
समुदाय के नेता बताते हैं कि उनकी यह मांग आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सम्मान के लिए है। उनका मानना है कि SC टैग के कारण उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जो व्यापार और सामाजिक विकास में बाधा डालता है। तमिलनाडु में पहले से ही 69 प्रतिशत आरक्षण है, इसलिए SC में रहने से उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा। उनकी मांग है कि पहले उन्हें SC से OBC में स्थानांतरित किया जाए और 10-15 वर्षों बाद सामान्य वर्ग में शामिल किया जाए।
समुदाय में विभाजन
इस मांग को लेकर समुदाय में मतभेद भी हैं। हिंदू परंपरा से जुड़े लोग SC से बाहर निकलने के पक्ष में हैं, जबकि ईसाई धर्म अपनाने वाले लोग आरक्षण को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु विधानसभा ने 2023 में धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों को भी SC आरक्षण देने की सिफारिश केंद्र से की थी। स्वतंत्र भारत में यह पहला अवसर है जब कोई समुदाय आरक्षण और कानूनी सुरक्षा को छोड़कर आत्म-सम्मान और सामाजिक गरिमा की मांग कर रहा है।
