तमिलनाडु की राजनीति में उठे सवाल, स्टालिन ने सरकार की स्थिरता पर उठाए प्रश्न
राजनीतिक हलचल का नया दौर
तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से हलचल देखने को मिल रही है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कषगम सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह सरकार अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी।
सहयोगी दलों पर निर्भरता
स्टालिन ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार पूर्ण बहुमत के बजाय सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर है, और अगले तीन से छह महीनों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि टीवीके को विधानसभा चुनाव में 108 सीटें मिलीं, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता थी। यह स्पष्ट संकेत है कि जनता ने टीवीके को अकेले सरकार चलाने का जनादेश नहीं दिया।
गठबंधन की अस्थिरता
स्टालिन ने कहा कि यह सरकार उन दलों के समर्थन से चल रही है, जो पहले डीएमके के गठबंधन का हिस्सा थे। उन्होंने इसे एक अस्थिर राजनीतिक व्यवस्था करार दिया और कहा कि कब यह गठबंधन टूट जाएगा, इसका कोई भरोसा नहीं है। डीएमके प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में जुटने का निर्देश दिया।
चुनाव की तैयारी का आह्वान
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव की घोषणा किसी भी समय हो सकती है, इसलिए पार्टी को पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए। स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनाव की घोषणा का इंतजार करने के बजाय संगठन को अभी से बूथ स्तर पर सक्रिय होना चाहिए। उन्होंने डीएमके की सत्ता में वापसी के लिए जमीनी स्तर पर अभियान शुरू करने का आह्वान किया।
तमिलगा वेट्री कषगम का ऐतिहासिक प्रदर्शन
तमिलगा वेट्री कषगम ने अपने गठन के बाद पहले विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया। अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय के नेतृत्व में पार्टी ने डीएमके और एआईएडीएमके के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को चुनौती दी। हालांकि, स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण पार्टी को अन्य दलों का समर्थन लेना पड़ा। विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 108 सीटें जीतीं, जबकि डीएमके को 59 और एआईएडीएमके को 47 सीटें मिलीं। कांग्रेस और अन्य दलों ने 20 सीटें जीतीं।
