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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नीट यूजी परीक्षा का विरोध किया

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने नीट यूजी परीक्षा का विरोध किया है, यह कहते हुए कि इससे ग्रामीण और गरीब परिवारों के छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। नीति आयोग की बैठक में उन्होंने 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दाखिले की मांग की। इस बैठक में विभिन्न विकास मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जिसमें मानव विकास और रोजगार शामिल हैं। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और क्या निर्णय लिए गए।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नीट यूजी परीक्षा का विरोध किया

नीट यूजी परीक्षा पर मुख्यमंत्री विजय का रुख


नई दिल्ली। मेडिकल में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली नीट यूजी परीक्षा के खिलाफ तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय का दृष्टिकोण पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के समान है। विजय ने नीति आयोग की बैठक में इस परीक्षा का विरोध करते हुए कहा कि यह ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पेपर लीक के कारण नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।


गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक दिल्ली में आयोजित की गई। इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उप राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के अधिकारी शामिल हुए। भाजपा शासित राज्यों पश्चिम बंगाल और बिहार के मुख्यमंत्री पहली बार इस बैठक में शामिल हुए। शुभेंदु अधिकारी ने मई में और सम्राट चौधरी ने अप्रैल में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।


इसके अलावा, गैर भाजपा और गैर एनडीए शासित तीन राज्यों के नए मुख्यमंत्री भी पहली बार बैठक में शामिल हुए, जिनमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन शामिल हैं। विजय ने बैठक में नीट परीक्षा का विरोध करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने तमिलनाडु के राज्य कोटा की एनबीबीएस, बीडीएस और आयुष सीटों पर 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दाखिले की मांग की।


नीति आयोग की बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समावेशी मानव विकास पर चर्चा की गई। बैठक में मानव विकास, रोजगार, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पोषण, समान अवसर और डिजिटल गवर्नेंस जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। इसके साथ ही, राज्यों के विकास विजन को राष्ट्रीय विजन के साथ जोड़ने और विकास योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।