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तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी और हाईकोर्ट से राहत

तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को अचानक हलचल मच गई जब DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ कई कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने उन्हें जल्द रिहा करने का आदेश दिया। इस घटना ने राज्य में विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया, जिसमें द्रमुक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। जानें इस राजनीतिक संकट की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
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राजनीतिक संकट का नया मोड़


नई दिल्ली: मंगलवार को तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति में अचानक उथल-पुथल मच गई, जब पुलिस ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रमुख नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को उनके चेन्नई स्थित नीलांकरई निवास से हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के दौरान कई द्रमुक कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिया। प्रारंभिक औपचारिकताओं के बाद, पुलिस ने उन्हें तंजावुर की ओर ले जाने का निर्णय लिया, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। कुछ घंटों के भीतर, मद्रास हाईकोर्ट से आई एक सूचना ने उदयनिधि और उनके समर्थकों को बड़ी राहत प्रदान की।


हाईकोर्ट का आदेश और द्रमुक का विरोध

हाईकोर्ट ने स्थिति को देखते हुए पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूछताछ के बाद नेता प्रतिपक्ष को स्टेशन बेल पर रिहा किया जाए। पुलिस कार्रवाई की खबर फैलते ही, द्रमुक कार्यकर्ता विभिन्न जिलों में सड़कों पर उतर आए और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थिति में सुधार हुआ। आरोप है कि जब उदयनिधि जनसभा को संबोधित कर रहे थे, तब भीड़ के एक हिस्से ने मशहूर तमिल अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर नारेबाजी की।


कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक तनाव

अदालत के कड़े रुख के बाद स्टेशन बेल पर रिहाई


मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार और तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने स्पष्ट किया कि पुलिस का उदयनिधि को रिमांड पर लेने का कोई इरादा नहीं है। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि उनसे केवल आवश्यक पूछताछ की जा रही है और इसके तुरंत बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। यह मामला तीन अगस्त को कावेरी जल विवाद के संदर्भ में तंजावुर में आयोजित एक किसान विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए भाषण से संबंधित है।


इस घटना के बाद, टीवीके के महिला पंख ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई, जबकि पार्टी नेतृत्व ने महिलाओं का अपमान करने और समाज में अशांति फैलाने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग में भी औपचारिक शिकायत की। टीवीके का आरोप है कि द्रमुक के आईटी सेल ने महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस विवादास्पद भाषण का दो मिनट 39 सेकंड का वीडियो प्रसारित किया।