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तूलिका मान: जूडो में भारत की नई पहचान और कॉमनवेल्थ में सफलता

तूलिका मान ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में भारत का नाम रोशन किया। उनकी यात्रा कठिनाइयों से भरी रही, लेकिन उन्होंने अपने समर्पण और मेहनत से सफलता हासिल की। जानें कैसे एक साधारण खेल ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और वे युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गईं।
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भारत का जूडो में शानदार प्रदर्शन

नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने इस खेल में 2 स्वर्ण और 1 रजत पदक सहित कुल 3 पदक जीते। यह पहली बार है जब भारत को जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है, जो भारतीय खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती उपस्थिति का प्रमाण है। इस सफलता में तूलिका मान का योगदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।


तूलिका मान की प्रेरणादायक यात्रा

तूलिका मान ने जूडो में भारत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका जन्म 9 सितंबर 1998 को दिल्ली में हुआ था, और उनकी जूडो खिलाड़ी बनने की यात्रा आसान नहीं रही। तूलिका ने अपने पिता को बचपन में खो दिया और उनकी मां ने उनका पालन-पोषण किया। प्रारंभ में, तूलिका को जूडो में कोई खास रुचि नहीं थी।


जूडो में रुचि का विकास

उनकी मां अमृता मान नौकरी के कारण दिन में घर से बाहर रहती थीं, जिससे तूलिका को अकेलेपन का सामना करना पड़ा। इस अकेलेपन को दूर करने के लिए उन्होंने जूडो क्लास जॉइन की, और यहीं से उनके खेल के प्रति रुचि जागृत हुई। चौथी कक्षा से जूडो का अभ्यास करते हुए, तूलिका ने अपनी मेहनत से साबित किया कि वह इस खेल में आगे बढ़ सकती हैं। राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।


अंतरराष्ट्रीय सफलता

तूलिका ने 78+ श्रेणी में 2017 में बिश्केक और 2018 में बेरूत में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते। इसके बाद, 2019 में काठमांडू में आयोजित दक्षिण एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में तूलिका ने रजत पदक जीता, जिससे उनकी प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली।


तूलिका का समर्पण

हालांकि, तूलिका ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भाग नहीं लिया। एक खेल को केवल व्यस्त रहने के लिए शुरू करना और उसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करना निश्चित रूप से कठिन परिश्रम और समर्पण की मांग करता है। तूलिका ने यह साबित किया है और वह उन युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो खेल के क्षेत्र में कुछ करना चाहती हैं।