तेलंगाना में मतदाता सूची में कटौती: 93 लाख को नोटिस जारी
मतदाता सूची में कटौती का मामला
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में, जिन राज्यों में मतदाता सूची का शुद्धिकरण चल रहा है, वहां बड़ी संख्या में नामों में कटौती हो रही है। हाल ही में दिल्ली में जारी मसौदा सूची के अनुसार, 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख के नाम हटा दिए गए हैं, जो कि लगभग 30 प्रतिशत है। अब दिल्ली में 97 लाख मतदाता बचे हैं।
तेलंगाना में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां तीन श्रेणियों में लगभग 50 प्रतिशत नाम या तो हटा दिए गए हैं या नोटिस भेजे गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि तेलंगाना में पश्चिम बंगाल की स्थिति दोहराई जा रही है। वहां 'एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड एंड डुप्लीकेट' (एएसडीडी) श्रेणी में बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं, जिसके चलते लाखों लोगों को नोटिस भेजे गए हैं।
तेलंगाना में कुल 3.38 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से एसआईआर के बाद जारी मसौदा सूची में 73.39 लाख नाम एएसडीडी श्रेणी में हटा दिए गए हैं। इसका मतलब है कि लगभग 20 प्रतिशत नाम कट गए हैं। इसके अलावा, बचे हुए 2.65 करोड़ मतदाताओं में से 60.5 लाख के नाम में गड़बड़ी बताकर नोटिस जारी किया गया है।
इस प्रकार, लगभग 93 लाख लोगों को नोटिस जारी किया गया है। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि 73.39 लाख नाम कट गए और 93 लाख को नोटिस भेजा गया। कुल मिलाकर, 3.39 करोड़ मतदाताओं में से एक करोड़ 67 लाख के नाम या तो हटा दिए गए हैं या नोटिस जारी किया गया है।
तेलंगाना की मसौदा सूची में और भी चौंकाने वाली बातें हैं। चुनाव आयोग ने जिन 73.39 लाख लोगों के नाम काटे हैं, उनमें से 45.19 लाख को स्थायी रूप से शिफ्ट होने की श्रेणी में रखा गया है। यह सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग कहां शिफ्ट हुए हैं। क्या वे आंध्र प्रदेश चले गए हैं? जबकि आंध्र प्रदेश में भी एसआईआर का काम चल रहा है और वहां केवल 45 लाख नाम कटे हैं।
तेलंगाना में दो साल बाद चुनाव होने वाले हैं, और भाजपा दक्षिण में कर्नाटक के बाद तेलंगाना में सत्ता हासिल करने की उम्मीद कर रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने चुनाव आयोग से एक महीने का समय और देने की मांग की है। यदि मामला नहीं सुलझा, तो जिन 93 लाख लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उनका मामला पश्चिम बंगाल की तरह वर्षों तक लटका रह सकता है।
