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तेहरान के समुद्री रूट से हटने पर टैंकर में धमाका

हाल ही में, ईरान के एक टैंकर में धमाका हुआ है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के निर्धारित मार्ग से हटने के बाद समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा गया। इस घटना के बाद ईरानी अधिकारियों ने कोई टिप्पणी नहीं की है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हाल के दिनों में कई जहाजों पर चेतावनी दी है। अमेरिका और ईरान के बीच शिपिंग रूट्स के प्रबंधन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
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तेहरान का टैंकर समुद्री बारूदी सुरंग से टकराया

नई दिल्ली। ईरानी मीडिया के अनुसार, एक तेल टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निर्धारित मार्ग से हटने के बाद समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा गया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस टैंकर में धमाका हुआ है। तस्नीम समाचार एजेंसी ने जानकारी दी है कि यह घटना उस समय हुई जब जहाज ने तेहरान द्वारा स्वीकृत मार्ग को छोड़ दिया था। ईरानी अधिकारियों ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल के 24 घंटों में छह जहाजों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं, जब वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहे थे। सरकारी टेलीविजन ने बताया कि इन जहाजों को उनके निर्धारित मार्ग से हटने के कारण रोका गया। शनिवार को भी, चार जहाजों को बिना अनुमति के गुजरने के कारण IRGC ने रोक दिया था। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के मार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विवाद एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, जिससे हाल के समय में टकराव बढ़ा है।

ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा अकरमिनिया ने कहा कि तेहरान ने अपने अधिकारों को स्थापित करने के लिए यह कदम उठाया। यह तब हुआ जब अमेरिका ने जून में हुए समझौते का उल्लंघन करते हुए एक अवैध मार्ग बनाने का प्रयास किया। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा, 'इन ऑपरेशन्स में, ईरान की सेना ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेस को अपने ऑपरेशन्स का केंद्र बनाया।'

अमेरिका और ईरान के बीच शिपिंग रूट्स के प्रबंधन को लेकर विवाद के कारण यह समझौता टूट गया है। अमेरिका ने लगातार 13 रातों तक ईरान पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमले किए। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटरसेप्टर मिसाइल के स्टॉक में कमी की चिंता और कूटनीति के लिए गुंजाइश बनाने के उद्देश्य से ट्रंप ने हमलों को रोकने का निर्णय लिया।