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त्योहारी सीजन में सोने की कीमतों में संभावित वृद्धि की उम्मीद

त्योहारी सीजन में सोने की कीमतों में संभावित वृद्धि को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बढ़ रही हैं। प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने सोने की खरीदारी में वृद्धि की है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति के बावजूद सोने की बुनियादी ताकत मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े निवेशक अपनी संपत्ति का एक छोटा हिस्सा भी सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो बाजार में मांग तेजी से बढ़ सकती है। जानें इस विषय पर और क्या कहते हैं विशेषज्ञ।
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सोने की कीमतों में गिरावट की उम्मीदें

नई दिल्ली - त्योहारी मौसम में यदि आप सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की आशा कर रहे हैं, तो आपको निराशा हो सकती है। हाल के हफ्तों में कई प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने सोने की खरीदारी में वृद्धि की है। अमुंडी, पिक्टेट, रोबेको और फिडेलिटी जैसी प्रमुख निवेश कंपनियां सोने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति के बावजूद सोने की बुनियादी ताकत मजबूत बनी हुई है।


साल के अंत तक सोने की कीमत 5000 डॉलर तक पहुंचने की संभावना

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमुंडी को उम्मीद है कि साल के अंत तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय बाजार में सोने की कीमत लगभग 2 लाख रुपये के आसपास पहुंचने की संभावना है।


रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन एक दर्जन से अधिक निवेश प्रबंधकों से बातचीत की गई, उनमें से अधिकांश ने या तो पहले ही सोने में निवेश बढ़ा दिया है या फिर इसकी कीमतों के प्रति सकारात्मक रुख बनाए रखा है। इन कंपनियों के पास मिलाकर लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन है, जिससे उनका सोने की ओर बढ़ता रुझान बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


फेडरल रिजर्व की सख्ती का निवेशकों पर असर नहीं

हालांकि, सोने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। अमेरिकी महंगाई को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख सख्त बना हुआ है और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी वृद्धि हो रही है। आमतौर पर बढ़ती बॉंड यील्ड सोने के लिए दबाव डालती है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता।


फिर भी, दीर्घकालिक निवेशक सोने को अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षा कवच के रूप में देख रहे हैं। रोबेको के अर्नाउट वैन रिजन के अनुसार, सोना अब कई सामान्य निवेश पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण स्थान बना चुका है।


सोने का बाजार सट्टेबाजी से आगे बढ़ा

पर्मानेंट पोर्टफोलियो फंड्स के माइकल कुगिनो ने जून में सोने की कीमतों में 4,000 डॉलर तक की गिरावट को खरीदारी का अवसर बताया था। उनका मानना है कि सोने की दीर्घकालिक कहानी अभी भी मजबूत है और कीमतें नए उच्च स्तर बना सकती हैं।


बीएनपी पारिबा की सोफी ह्यून के अनुसार, सोने में पहले जैसी सट्टेबाजी वाली तेजी अब नहीं है। मौजूदा तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और बड़े निवेश प्रबंधकों की पोर्टफोलियो सुरक्षा की रणनीति जैसी बुनियादी वजहें अधिक महत्वपूर्ण हैं।


केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सोने को समर्थन

सोने की कीमतों को सहारा देने वाली सबसे बड़ी वजहों में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। अप्रैल से जून के बीच केंद्रीय बैंकों ने 289 टन सोने की शुद्ध खरीदारी की, जो किसी दूसरी तिमाही के मुकाबले सबसे अधिक बताई गई है।


ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो ने अमेरिकी कर्ज संकट के जोखिम को देखते हुए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का करीब 15 फीसदी हिस्सा सोने में रखने की सलाह दी है।


डॉलर से दूरी और सोने की ओर रुझान

अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कुछ निवेशक डॉलर से पैसा निकालकर सोने और बिटकॉइन जैसी वैकल्पिक परिसंपत्तियों की ओर देख रहे हैं। अमेरिप्राइज फाइनेंशियल के एंथनी सैग्लिम्बिन का मानना है कि डॉलर की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ने से सोने को फायदा मिल सकता है।


हालांकि, इन्वेस्को के क्रिस्टोफर हैमिल्टन का कहना है कि फिलहाल डॉलर का कोई स्पष्ट और मजबूत विकल्प मौजूद नहीं है।


पश्चिमी निवेशकों की खरीदारी से बढ़ सकती है मांग

सोने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पश्चिमी निवेशकों के कुल पोर्टफोलियो में अभी भी सोने की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। यदि बड़े निवेशक अपनी संपत्ति का छोटा हिस्सा भी सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो बाजार में मांग तेजी से बढ़ सकती है।


इसलिए, विशेषज्ञों की नजर अब केवल केंद्रीय बैंकों की खरीद पर नहीं, बल्कि पश्चिमी निवेशकों की संभावित नई खरीदारी पर भी है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो त्योहारी सीजन में सोने की कीमतों में राहत के बजाय नई तेजी देखने को मिल सकती है।