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त्योहारों के दौरान हवाई किराए में वृद्धि: सुप्रीम कोर्ट और संसद में उठे सवाल

त्योहारों के मौसम में हवाई किराए में अचानक वृद्धि एक गंभीर मुद्दा बन गया है। सुप्रीम कोर्ट में इस पर जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें हवाई टिकटों की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की गई है। संसद में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, जहां सरकार ने बताया कि किराए की वृद्धि कई कारकों पर निर्भर करती है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और यात्रियों को कब मिलेगी राहत।
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त्योहारों का मौसम और हवाई यात्रा की चुनौतियाँ

भारत में त्योहारों का समय आ चुका है, जिसमें दिवाली और छठ जैसे प्रमुख उत्सव शामिल हैं। इस दौरान, बाहर रहने वाले लोगों के लिए घर लौटने के लिए टिकट खरीदना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। जैसे ही ट्रेनों की बुकिंग शुरू होती है, सीटें तेजी से भर जाती हैं, और कई ट्रेनों में वेटिंग के बजाय 'रेग्रेट' दिखाई देने लगता है। वहीं, हवाई यात्रा के लिए टिकटों की कीमतें इतनी बढ़ जाती हैं कि लोगों को खरीदने में कठिनाई होती है। हर साल की तरह, इस बार भी हवाई टिकटों की कीमतें पहले से ही आसमान छूने लगी हैं।


सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई

पिछले वर्ष, सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण ने हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की थी। यह याचिका S. Laxminarayanan बनाम Union of India & Others (W.P.(C) No. 1124/2025) के नाम से जानी जाती है। याचिका में मांग की गई है कि हवाई टिकटों की कीमतों में अचानक और अत्यधिक वृद्धि को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं। इसके साथ ही, टिकटों की कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था को भी स्पष्ट किया जाए।


सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का समय

इस मामले की सुनवाई 23 फरवरी 2026 को हुई, जिसमें केंद्र सरकार ने अपना जवाब देने के लिए समय मांगा। बाद में, केंद्र ने बताया कि भारतीय विमानन अधिनियम, 2024 के तहत नए नियम बनाए जा रहे हैं। हालांकि, अदालत ने अभी तक हवाई टिकटों की कीमतों की अधिकतम सीमा तय करने का कोई निर्णय नहीं लिया है।


संसद में हवाई किराए पर चर्चा

संसद में भी हवाई किराए को लेकर कई बार सवाल उठाए गए हैं। सरकार का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस खुद किराया तय करती हैं। हालांकि, यह मांग, सीटों की उपलब्धता, ईंधन की कीमत और यात्रा के समय जैसे कारकों पर निर्भर करता है। इसके अलावा, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) यह सुनिश्चित करता है कि एयरलाइंस अपनी घोषित किराया व्यवस्था के अनुसार ही शुल्क ले रही हैं।


यात्रियों को राहत कब मिलेगी?

त्योहारों के दौरान हवाई किराए में अचानक वृद्धि एक पुरानी समस्या है। संसद में सवाल उठने और सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई होने के बावजूद, यात्रियों को अचानक बढ़ते किराए से बचाने के लिए कोई ठोस नियम अभी तक लागू नहीं हुआ है। हालांकि, सरकार नए विमानन नियमों पर काम कर रही है और संसदीय समिति ने महंगे किराए की शिकायतों के लिए नई व्यवस्था का सुझाव दिया है। अब इस मामले में 25 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी।