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त्योहारों में साइबर धोखाधड़ी से बचने के उपाय

त्योहारों के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग में साइबर धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में जानें कि कैसे आप फर्जी डिस्काउंट, नकली कैशबैक और धोखाधड़ी से बच सकते हैं। जानिए यूपीआई भुगतान में सावधानी बरतने के तरीके और संदिग्ध लिंक्स से कैसे बचें। अपने डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सुझावों के साथ इस त्योहारी सीजन में सुरक्षित रहें।
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त्योहारों के दौरान साइबर धोखाधड़ी का खतरा

त्योहारों में साइबर धोखाधड़ी: जैसे-जैसे त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी और यूपीआई लेनदेन में वृद्धि हो रही है, साइबर धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। क्विक हील की रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर मिनट औसतन 702 मैलवेयर डिटेक्शन हो रहे हैं। इसलिए, फर्जी डिस्काउंट, नकली कैशबैक और लॉटरी के झांसे से बचने के लिए सतर्क रहना और तकनीकी सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है।


ऑनलाइन भुगतान में सावधानी बरतें

गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और रोहतक जैसे प्रमुख शहरों में ऑनलाइन ऑर्डर और डिजिटल भुगतान में भारी वृद्धि देखी गई है। साइबर ठग उपभोक्ताओं की व्यस्तता का फायदा उठाकर फर्जी कैशबैक, लकी ड्रॉ और रिफंड के झूठे संदेश भेजते हैं। क्विक हील की इंडिया साइबर थ्रेट रिपोर्ट 2025 में बताया गया है कि देशभर में 8.44 मिलियन एंडपॉइंट्स पर 369.01 मिलियन मैलवेयर डिटेक्शन हुए हैं। यह आंकड़ा प्रति मिनट 702 साइबर हमलों की पुष्टि करता है।


संदेहास्पद लिंक्स से बचें

संदेहास्पद लिंक्स से बनाएं दूरी: त्योहारी सीजन में वॉट्सऐप, मैसेज या सोशल मीडिया पर 'केवल आज के लिए' या 'लिमिटेड कैशबैक' जैसे संदेशों की भरमार होती है। जालसाजों का उद्देश्य होता है कि उपभोक्ता बिना सोचे-समझे भेजे गए लिंक पर क्लिक कर दें। ऐसे किसी भी लिंक को खोलने से पहले उसके यूआरएल और वेबसाइट के नाम की स्पेलिंग को ध्यान से जांचें।


यूपीआई भुगतान में सावधानी

यूपीआई भुगतान में न करें जल्दबाजी: ऑनलाइन खरीदारी के दौरान सबसे अधिक धोखाधड़ी यूपीआई पेमेंट के माध्यम से होती है। जालसाज अक्सर रिफंड या कैशबैक ट्रांसफर के नाम पर क्यूआर कोड भेजते हैं। यह सामान्य नियम याद रखें कि किसी भी माध्यम से पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती।


फर्जी डिलीवरी और कस्टमर केयर से सतर्कता

फर्जी डिलीवरी और कस्टमर केयर से सतर्कता: त्योहारी दिनों में पार्सल की संख्या बढ़ने से डिलीवरी संबंधी फर्जी मैसेज भी तेजी से भेजे जाते हैं। ऐसे मैसेज में कहा जाता है कि आपका सामान अटक गया है या पता गलत होने के कारण पार्सल वापस जा रहा है। इन मैसेज में दिए गए लिंक ग्राहकों को फिशिंग पेज पर ले जाकर उनके कार्ड और नेट बैंकिंग का गोपनीय डेटा चुरा लेते हैं।


फोन कॉल और डिवाइस की सुरक्षा

फोन कॉल और डिवाइस की सुरक्षा: साइबर ठग खुद को बैंक अधिकारी या कोरियर कंपनी का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं। वे आपकी बुनियादी जानकारी पहले से जुटाकर बात को प्रामाणिक दिखाने की कोशिश करते हैं। किसी भी स्थिति में फोन पर अपना ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।