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दिल्ली उच्च न्यायालय में सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति

दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को सात न्यायिक अधिकारियों ने न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, जिससे न्यायाधीशों की संख्या 50 हो गई है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने इन अधिकारियों को शपथ दिलाई। इनमें से दो को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि अन्य पांच को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति से पहले, न्यायमूर्ति पराशर और न्यायमूर्ति भारद्वाज महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। जानें इस नियुक्ति के पीछे की प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।
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दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि


दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को सात न्यायिक अधिकारियों ने न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, जिससे न्यायाधीशों की कुल संख्या 50 हो गई है। अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 है, जिसमें 45 स्थायी और 15 अतिरिक्त न्यायाधीश शामिल हैं।


मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने न्यायमूर्ति निवेदिता अनिल शर्मा, न्यायमूर्ति निशा सहाय सक्सेना, न्यायमूर्ति संजय शर्मा, न्यायमूर्ति भरत पाराशर, न्यायमूर्ति अदिति चौधरी, न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज को शपथ दिलाई। ये सभी पहले से ही जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के रूप में कार्यरत थे।


शपथ ग्रहण समारोह उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित किया गया, जहां मुख्य न्यायाधीश ने नए न्यायाधीशों को बधाई दी। न्यायमूर्ति निवेदिता अनिल शर्मा और न्यायमूर्ति सक्सेना को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया और उन्होंने अंग्रेजी में शपथ ली।


अन्य पांच न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है, जिन्होंने हिंदी में शपथ ली। न्यायमूर्ति पराशर पहले उच्चतम न्यायालय में सेक्रेटरी जनरल के पद पर थे, जबकि न्यायमूर्ति भारद्वाज को दिल्ली उच्च न्यायालय का रजिस्ट्रार जनरल नियुक्त किया गया था।


न्यायमूर्ति सक्सेना, न्यायमूर्ति संजय शर्मा और न्यायमूर्ति भट्ट क्रमशः रोहिणी, कड़कड़डूमा और राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे।


न्यायमूर्ति निवेदिता अनिल शर्मा और न्यायमूर्ति चौधरी पहले जिला न्यायपालिका से सेवानिवृत्त हो चुके थे और उनके नामों की सिफारिश उच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए पहले ही की जा चुकी थी।


उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की सिफारिश के बाद, केंद्र सरकार ने 19 सितंबर को इन सात न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियों के संबंध में अधिसूचना जारी की थी।